Wednesday, October 16, 2013

HINDI VISHW VIDYALAY PAR DUBARA KABJE KE LIYE RASHTRAPATI KE BETE AUR MAHASHVETA KI SHARAN PAHUNCHE VIBHUTI NARAYAN RAI ?

sattachakra.blogspot.in
date16-10-2013


http://www.jansatta.com/index.php/component/content/article/1-2009-08-27-03-35-27/52920-2013-10-16-04-10-52?tmpl=component&print=1&page=

lekhikayon ko chhinal kahanevale,chorguru sanrakshak,ghotala aaropi v.n.rai(ips)




राकेश तिवारी
नई दिल्ली। एक और कार्यकाल हासिल करने के लिए कई दांव-पेच आजमाने के बाद महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के विवादग्रस्त कुलपति विभूति नारायण राय ने क्या ब्रह्मास्त्र का इस्तेमाल किया है? पता चला है कि वे राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बेटे सांसद अभिजीत मुखर्जी और बांग्ला की प्रख्यात लेखिका महाश्वेता देवी के जरिए राष्ट्रपति पर दबाव बनाने में जुटे हैं।
राष्ट्रपति हिंदी विश्वविद्यालय के विजिटर हैं। पूर्व पुलिस अधिकारी राय की मुश्किल यह है कि उनके खिलाफ गंभीर शिकायतों का अंबार ही नहीं है, सतर्कता आयोग तक में अनेक शिकायतों की जांच लंबित है। महिला-विरोधी विचार प्रकट करने के लिए उन्हें केंद्र सरकार को सफाई देने के बाद सार्वजनिक माफी मांगनी पड़ी थी। इस मुद्दे को लेकर किसी कुलपति के खिलाफ संभवत: पहली बार हिंदी के लगभग दो सौ लेखकों ने बयान जारी किया था।
दिलचस्प बात यह है कि नए कुलपति के लिए केंद्र सरकार गठित सर्च कमेटी में राष्ट्रपति द्वारा ही मनोनीत संयोजक, कवि-आलोचक और हिंदी विश्वविद्यालय के संस्थापक-कुलपति अशोक वाजपेयी, के विरोध के बावजूद राष्ट्रपति को भेजे गए पांच नामों में विभूति नारायण राय अपना नाम जुड़वाने में सफल रहे हैं। कमेटी में लखनऊ से आए मैनेजमेंट गुरुप्रीतम सिंह के साथ विदुषी कपिला वात्स्यायन ने भी चौथे नाम के स्थान पर राय का नाम जुड़वाने में सहमति जाहिर कर दी। इस पर अशोक वाजपेयी ने इस विवादास्पद नाम पर अपनी लिखित क­­­­ड़ी आपत्ति दर्ज की।
राष्ट्रपति के प्रतिनिधि होने के कारण राष्ट्रपति के समक्ष अशोक वाजपेयी की राय का महत्त्व बढ़ जाता है। माना जाता है इसी की काट के लिए विभूति नारायण राय ने राष्ट्रपति के बेटे और प्रतिष्ठित बांग्ला कथाकार महाश्वेता की शरण ली है। महाश्वेता देवी के करीबी पत्रकार को राय अपने विश्वविद्यालय में अच्छी-खासी नियुक्ति दे चुके हैं। बताया जाता है कि पत्रकार राष्ट्रपति के बेटे अभिजीत के बीच भी कड़ी का काम कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक सर्च कमेटी ने जो पांच नाम हिंदी विश्वविद्यालय के अगले कुलपति के लिए प्रस्तावित किए, उनमें पहला नाम संघ लोक सेवा आयोग के पूर्व सदस्य और आलोचक पुरुषोत्तम अग्रवाल का है। दूसरा भाषाविद् और विश्व भारती के प्रो-वाइस चांसलर उदय नारायण सिंह का, तीसरा राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के कुलपति राधावल्लभ त्रिपाठी का और चौथा विभूति नारायण राय का है। आखिरी नाम प्रो गिरीश्वर मिश्र का बताया जाता है। हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति के तौर पर विभूति नारायण राय का कार्यकाल इसी महीने के अंत में पूरा होने वाला है।
गौरतलब है कि कपिला वात्स्यायन और प्रीतम सिंह को विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने सर्च कमेटी के लिए नामित किया है। आरोप है कि राय की ओर से सर्च कमेटी के एक सदस्य के जरिए प्रस्तावित सूची में राय का नाम शामिल करवाने के लिए संयोजक अशोक वाजपेयी पर दबाव डाला गया। एक सदस्य के अंत तक अड़ जाने पर वाजपेयी ने पांच नामों में विभूति का नाम तो शामिल कर लिया, लेकिन साथ में अपनी असहमति का नोट भी नत्थी कर दिया। बताया जाता है राष्ट्रपति को भेजी गई पांच लोगों की सूची में अपना नाम जुड़वाने और इसके लिए सर्च कमेटी के सदस्यों को प्रभावित करने के प्रयास में राय ने दिल्ली और कोलकाता में भारी लाबिंग की।
इस बारे में संपर्क करने पर वाजपेयी ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। सूत्रों के मुताबिक वाजपेयी ने राष्ट्रपति को भेजे गए अपने असहमति नोट में कई मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि मार्च में केंद्रीय सतर्कता आयोग ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को राय के खिलाफ मिली शिकायतों की जांच करने को कहा था। सतर्कता आयोग ने मंत्रालय को जांच के लिए बारह हफ्ते का समय दिया था। लेकिन मंत्रालय ने अब तक अपनी जांच रिपोर्ट आयोग को नहीं भेजी है। वाजपेयी ने कहा कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने भी 2009-11 और 2011-12 की अपनी रिपोर्ट में विश्वविद्यालय प्राधिकारियों की गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की ओर संकेत किया था। सूत्रों का यह भी कहना है कि वाजपेयी ने  कहा है कि राय के कुलपति रहते हिंदी विश्वविद्यालय उम्मीदों पर खरा उतरने में नाकाम रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय के स्तर में गिरावट के लिए कमजोर फैकल्टी और शोध कार्य को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने यह भी कहा है कि यह विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय होना तो दूर, राष्ट्रीय भी नहीं हो सका और क्षेत्रीय विश्वविद्यालय होकर रह गया। सर्च कमेटी के बाकी दो सदस्यों से संपर्क करने का प्रयास किए जाने के बावजूद उनसे संपर्क नहीं हो पाया।
सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रपति, उनकी सचिव और मंत्रालय को विभूति नारायण राय के खिलाफ आरोपों से जुड़े और कई पत्र अन्य लोगों की ओर से भी भेजे गए हैं। देखना है कि इन पत्रों और अशोक वाजपेयी की आपत्ति के मद्देनजर अब विश्वविद्यालय के विजिटर के नाते राष्ट्रपति क्या फैसला करते हैं। हालांकि कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति के निर्णय में मानव संसाधन विकास मंत्रालय की राय अहम होगी और इसी के मद्देनजर आशंका यह भी जताई जा रही है कि कहीं मंत्रालय के स्तर पर ही असहमति का वह नोट रफा-दफा न कर दिया जाए। दूसरी तरफ राष्ट्रपति के कामकाज के तरीके और स्वतंत्र निर्णयों को देखते हुए जानकारों का कहना है कि वे सर्च कमेटी की वरीयता सूची में से विभूति नारायण को चौथे नंबर से पहले नंबर पर ले आने का फैसला नहीं करेंगे। सतर्कता विभाग में लंबित मामले को देखते हुए मंत्रालय में भी राय का समर्थन मजबूत होने की आशंका जानकार कम मानते हैं।

यह खबर हिन्दी दैनिक जनसत्ता  नई दिल्ली में 16-10-2013 को छपी है ।
 ­­­

Monday, October 14, 2013

RASTRAPATI DADA APANE BETE KE KAHANE PAR, LEKHIKAYON KO CHHINAL KAHANE VALE GHOTALA,BHRASTACHAR AAROPI CHORGURU SANRAKSHAK V.N.RAI(IPS) KO BANAYENGE DUBARA KULAPATI ?

SATTACHAKRA.BLOGSPOT.IN
DATE14-10-2013
यह खबर कई राज्यों के कई अखबार में 13-10-2013 और 14-10-2014 को छपी है ।


क्या राष्ट्रपति दादा अपने सांसद पुत्र की सिफारिश पर, लेखिकाओं को छिनाल कहनेवाले घोटाला,भ्रष्टाचार आरोपी  चोरगुरू संरक्षक पुलिसवाले को बनायेंगे  दुबारा कुलपति ?

: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा के घोटाला ,भ्रष्टाचार आरोपी, चोरगुरू अनिल कुमार राय को प्रोफेसर नियुक्त कर डीन बना बचाने  और लेखिकाओं को छिनाल कहने वाले कुलपति विभूति नारायण राय(आईपीएस) ने सर्च कमेटी में अपने द्वारा ( एक्जक्यूटिव कमेटी का सर्वेसर्वा कुलपति) नामित दो सदस्यों चर्चित  कपिला वात्यायन और जुगाड़ी प्रीतम सिंह के मार्फत अपना नाम एक टर्म और कुलपति के लिए डलवा दिया है। लेकिन राष्ट्रपति की तरफ से नामित प्रख्यात साहित्यकार अशोक वाजपेई ने छिनाली फेम व भ्रष्टाचार , घोटाला आरोपी विभूति नारायण राय के विरूद्ध नोट लगा दिया है।चर्चा है कि उसकी काट करके अपना नाम आगे बढ़वाने और राष्ट्रपति द्वारा उस पर मंजूरी दिलवाने के लिए भयंकर जुगाड़ी विभूति ने राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी  के सांसद पुत्र के यहां जुगाड़ लगाया है। अपने विरादर सपा सांसद रेवती रमण के मार्फत मुलायम सिंह यादव से जुगाड़ लगा रहे हैं। कोलकाता में रहने वाली महाश्वेता देवी से भी प्रणव मुखर्जी के यहां सिफारिश लगवाने की कोशिश में लगे हैं। नामवर सिंह के मार्फत भी जुगाड़ लगा रहा है।  देखिये राष्ट्रपति दादा अपने सांसद पुत्र , मुलायम,महाश्वेता,नामवर आदि की सिफारिश पर इस भ्रष्टाचार आरोपी,महिला साहित्यकारों को छिनाल कहने वाले चोरगुरू संरक्षक पुलिस वाले वी एन राय (आईपीएस) को महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय को और बर्बाद करने के लिए एक टर्म और देते हैं या नहीं ।    

LEKHIKAYON KO CHHINAL KAHANE VALE , BHRASTACHAR AAROPI KULAPATI V.N.RAI(IPS)
CHORGURU ANIL KUMAR RAI

MGAHVV WARDHA KE CHANCELLOR NAMVAR SINGH
  

Tuesday, October 1, 2013

medical ghotala me masood ko saja to shiksha ghotala me chor guruyon,corrupt guruyon unake sanrakshak kulpatiyon,kulsachivon ko kyon nahi ?



मेडिकल सीट घोटाला में पूर्व मंत्री मसूद को सजा तो शिक्षा घोटाला मामले में चोरगुरूओं,भ्रष्टाचारी गुरूओं उनके संरक्षक कुलपतियों,कुलसचिवों ,अफसरों को क्यों नहीं ?
Dainik Bhaskar
मेडिकल सीट घोटाला: मसूद को चार साल की जेल, सजा सुनते ही सन्‍न रह गए पूर्व मंत्री
Bhaskar.com   |  Oct 01, 2013, 17:45PM
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री  लालू यादव को चारा घोटाला मामले में सजा सुनाए जाने के बाद एक और नेता की राजनीति खतरे में पड़ गई है। तीस हजारी की सीबीआई की विशेष अदालत ने 1990-91 में मेडिकल कॉलेजों में उम्मीदवारों को फर्जी ढंग से प्रवेश दिलाने के मामले में दोषी करार दिए गए कांग्रेसी सांसद रशीद मसूद को चार साल कैद की सजा सुनाई है। सजा का ऐलान करते ही न्‍यायाधीश के आदेश पर उन्‍हें हिरासत में लेकर तिहाड़ जेल भेज दिया गया। अब मसूद राज्‍यसभा सदस्‍य नहीं रह पाएंगे और न ही छह साल तक कोई चुनाव लड़ सकेंगे।
मसूद के अलावा मामले में दोषी करार दिए गए दो रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों को भी चार वर्ष कारावास तथा फर्जी तरीके से एमबीबीएस में दाखिला लेने वाले नौ छात्रों को एक-एक वर्ष कारावास की सजा सुनाई गई है। छात्रों की तरफ से अदालत में जमानत आवेदन दायर किया गया है। विशेष न्‍यायाधीश जेपीएस मलिक ने फैसला सुनाए जाने के दौरान मामले की सुनवाई बंद कमरे में की और सजा का ऐलान किया। फैसला सुनते ही रशीद सन्‍न रह गए।
..........................................................................................................


...........बहस के दौरान सीबीआई के वकील ने जज से कहा था कि रशीद मसूद ने काबिल छात्रों का करियर बिगाड़ा है, उन्हें कम-से-कम सात साल की सजा जरूर मिलनी चाहिए।

कोर्ट में सजा पर कैसी चली बहस
दोषी करार दिए गए रशीद मसूद ने देश की लंबे समय तक की गई सेवा और खराब सेहत कारणों का हवाला देते हुए अदालत से सजा में नरमी की मांग की, जबकि सीबीआई ने उन्हें कम से कम 7 साल की सजा देने और उन पर भारी जुर्माना लगाने की अपील की। 67 वर्षीय मसूद के वकील ने सजा की अवधि पर दलील देते हुए सीबीआई के स्पेशल जज जे. पी. एस. मलिक से कहा, 'मैं पिछले 30 सालों से संसद सदस्य हूं और मैं कानून का पालन करने वाला नागरिक हूं। मामले के नेचर, मेरी उम्र और पहले की साफ छवि को ध्यान में रखते हुए मुझे प्रॉबेशन का लाभ दिया जाना चाहिए।'

सीबीआई के वकील वी.एन. ओझा ने हालांकि उनकी प्रॉबेशन की अपील का विरोध करते हुए कहा, 'रशीद मसूद को सात साल से कम सजा नहीं मिलनी चाहिए और उन पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए क्योंकि अपने रिश्तेदार सहित अयोग्य उम्मीदवारों को नामित करके उन्होंने काबिल छात्रों का कैरियर बिगाड़ दिया है।'

1990
में वी. पी. सिंह सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे मसूद को केंद्रीय पूल से देशभर के मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए त्रिपुरा को आवंटित एमबीबीएस सीटों पर धोखाधड़ी से अपात्र उम्मीदवारों को नामित करने का दोषी ठहराया गया था।

स्पेशल सीबीआई जज जे. पी. एस. मलिक ने मसूद को आईपीसी की धाराओं 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र), 420 (धोखाधड़ी) और 486 (जालसाजी) तथा भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया था। हालांकि उन्हें आईपीसी की धारा 471 के तहत लगे आरोपों से बरी कर दिया गया, जो फर्जी दस्तावेज को वास्तविक के तौर पर इस्तेमाल करने से जुड़ी है।
.................................................................................................................................................
 ये प्रमाण हैं जो साबित करते हैं कि जब चारा घोटाला मामले में लालू,जगन्नाथ आदि व मेडिकल सीट घोटाला मामले में मसूद व अन्य को सजा हो सकती है तो शिक्षा घोटाला,शैक्षणिक भ्रष्टाचार मामले में वीर बहादुर सिंह वि.वि. जौनपुर ,महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी,बुंदेलखंड वि.वि. झांसी,महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय वि.वि. वर्धा के चोरगुरूओं,शैक्षणिक भ्रष्टाचारियों,उनके संरक्षक कुलपतियों,कुलसचिवों,उनको संरक्षण दे रहे अफसरों को क्यों नहीं ?

देखिए यहां सीबीआई के वकील ने कोर्ट में क्या कहा है-
सीबीआई के वकील वी.एन. ओझा ने हालांकि उनकी प्रॉबेशन की अपील का विरोध करते हुए कहा, 'रशीद मसूद को सात साल से कम सजा नहीं मिलनी चाहिए और उन पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए क्योंकि अपने रिश्तेदार सहित अयोग्य उम्मीदवारों को नामित करके उन्होंने काबिल छात्रों का कैरियर बिगाड़ दिया है।'

इस आधार पर तो यही  मामला  बनता है प्रो.राममोहन पाठक पर म.म.मो.मा.पत्रकारिता संस्थान,काशी विद्यापीठ का निदेशक रहने के दौरान अपने सगे पुत्र का नम्बर बढ़ाने  के आरोप वाले मामले में ,अन्य कई शैक्षणिक भ्रष्टाचार के मामले में  और उसके लड़के पर भी जो इस समय बिहार में एक वि.वि. में पत्रकारिता का लेक्चरर हो गया है।
इसी तरह का मामला चोरगुरू,शैक्षणिक भ्रष्टाचारी डा. अनिल कुमार राय अंकित और उसको  मगांअंहिविवि वर्धा में प्रोफेसर नियुक्त कराकर डीन बनाने और उसको साढ़े चार साल तक बचाते रहने वाले कुलपति छिनाली फेम वाले विभूति नारायण राय आईपीएस   पर भी  बनता है। वीबसिंपूविवि,मगांकाविपीठ के कुलपतियों ,कुलसचिवों पर उनके संरक्षक अफसरों पर भी बनता है।