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Thursday, September 19, 2013

V.C.-V.N.RAI KIS TARAH CHORGURU ANIL K. RAI KO BACHA RAHE HAIn, DEKHEN C.D.

 
"chorguru"episode-10,part-1,date 20-12-2009


                                             "chorguru"episode-10,part-2,date 20-12-2009




sattachakra.blogspot.in
date19-09-13,02.16P.M.
 उक्त सीडी CNEB न्यूज चैनल पर दिनांक 20-12-2009 को "चोरगुरू" कार्यक्रम के 10वें एपीसोड में दिखाई गई थी। जिसमेंदिखाया गया है कि महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय,वर्धा के कुलपति विभूति नारायण राय (v.n.rai,i.p.s.) किस तरह पुलिसिया अनुभव का प्रयोग अपने चहेते सजातीय चोरगुरू,भ्रष्टाचार गुरू अनिल कुमार राय को बचाने के लिए कर रहे हैं , और उसके लिए किस तरह के तर्क दे रहे हैं। सबूत देने के बाद भी अब तक कुछ नहीं किया। 2009 से  अब तक (सितम्बर 2013 ) उसको बचाया है , उसीतरह के  शैक्षणिक कदाचार के मामले में डा.अनिल कुमार राय के ही साथी चोरगुरू डा. दीपक केम को जामिया मिलिया दिल्ली के  तबके कुलपति जंग(अब उपराज्यपाल दिल्ली) ने रीडर पद से  बर्खास्त किया ,लेकिन विभूति ने अनिल राय को  अब तक बर्खास्त नहीं किया।दिखावा करने के लिए चोरगुरूओं के चहेते ,महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ,वाराणसी के   एक भ्रष्टाचार आरोपी पूर्व कुलपति को जांच अधिकारी बनाया था। उस जांच का क्या हुआ अब तक किसी को पता नहीं। छिनाली फेम वाले इस विभूति का कुलपति पद पर 5 साल का कार्यकाल  29अक्टूबर 2013 को पूरा हो रहा है।मानवसंसाधन विकास मंत्रालय में चर्चा है कि छिनाली फेम विभूति ने एक टर्म और पाने और अपने को तथा अपने सजातीय यार चोरगुरू अनिल कुमार राय को क्लीन चिट दिलाने के उपक्रम के तहत एक जांच कमेटी गठित किया है , लेकिन उसको भी एक माह आगे बढ़ा दिया है। यह भी चर्चा है कि यह नामवर सिंह जैसे लाभालाभी लोगों के मार्फत जुगाड़ लगाकर एक टर्म और पाने , यह नहीं हुआ तो  कहीं और कुलपति बनने के लिए पूरा जोर लगा दिया है।इसके लिए पहले की तरह से ही साम-दाम-दंड-भेद वाला हर हथकंडा अपना रहा है।
इस सीडी में वीर बहादुर सिंह विश्वविद्यालय जौनपुर,महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ,वाराणसी के चोरगुरूओं के और बुंदेलखंड वि.वि.,झांसी के कुलपति रहे रमेश चंद्रा के भी भयंकर चौर्यकर्म के बारे में भी है।

Tuesday, September 17, 2013

CORRUPTGURU,CHORGURU Anil Kumar Rai KO BACHA RAHE APSU REWA ke V.C.,REGISTRAR ?

sattachakra.blogspot.in
date 17-09-13,09.25P.M.
क्या
चोरगुरू अनिल कुमार राय को बचा रहे हैं अवधेशप्रताप सिंह वि.वि.रीवा के कुलपति,कुलसचिव ?
 -कृष्णमोहन सिंह

नईदिल्ली। चोरगुरू अनिल कुमार राय ने अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय
,रीवा (म.प्र.) से पत्राचार से बी.जे.( बैचलर इन जर्नालिज्म) किया। उसमें पढ़ने के लिए उसको जो
पुस्तिका मिली उसका कई अध्याय हूबहू कट पेस्ट करके,उतारकर अपनी पुस्तक
"संचार के सात सोपान" का अध्याय 7, फिल्मों की दुनिया बना लिया।विश्वविद्यालय के अधिकारियों,संबंधित विभाग के प्रमुख की माफ नहीं की जाने वाली लापरवाही से  पुस्तिका में  भले ही कापी राइट वाला लोगो छूट गया है , लेकिन पुस्तिका में यह भी  कहीं नहीं लिखा है कि यह सामग्री फ्री की है,और इसे कोई भी
जितना चाहे अध्याय का अध्याय उतारकर अपने नाम से पुस्तक छाप सकता है या कहीं और उपयोग कर सकता है। वैसे भी जिन पुस्तकों में लिका भी हो कि सामग्री मुफ्त की है तब भी कोई व्यक्ति उसको हूबहू अध्याय का अध्याय उतारकर अपने नाम से पुस्तक छाप लेखक नहीं बन सकता , नहीं उसके आधार पर नौकरी व प्रोमोशन ले सकता है। यदि ऐसा करता है तो उसपर नकलकरने का,दूसरे की सम्पत्ति चोरी करने और यदि वह व्यक्ति लेक्चरर,रीडर,प्रोफेसर है तो  उसपर शैक्षणिक कदाचार,शिक्षक के चरित्र के विरूद्ध आचरण,भ्रष्टाचार,420,फोर्जरी का मुकदमा चलाया जा सकता है,नौकरी से बर्खास्त किया जा सकता है। जैसा कि अनिल कुमार राय के मित्र व साथ मिलकर नकल करके पुस्तक लिखने वाले डा. दीपक केम का हुआ। उन्होंने भी नकल करके पुस्तक लिखा था और उसे दिल्ली के उसी प्रेस से छपवाया ,प्रकाशित करवाया था जहां से अनिल कुमार राय ने । लेकिन राय को म.गां.अं.हि.वि.वि.,वर्धा के चोरगुरू संरक्षक  कुलपति वी.एन.राय (आई.पी.एस) ने प्रोफेसर बनाकर बचाने का काम करते रहे हैं, जबकि दीपक केम को जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली के तबके कुलपति नजीब जंग (आई.ए.एस.,इस समय दिल्ली के उपराज्यपाल हैं) ने नकल व शैक्षणिक कदाचार के मामले में बर्खास्त कर दिया।जिसे दिल्ली हाई कोर्ट के डबल बेंच ने भी जायज ठहराया।
इधर वर्धा के चोरगुरू की हालत तो यह हो गई है कि  पुलिस से कुलपति बने छिनाली फेम वाले विरादर विभूति नाराय राय (V.N.RAI I.P.S.) के संरक्षण में प्रोफेसर और हेड बनने के बाद चोरगुरू
अनिल कुमार राय कहने लगा है कि वह तो फ्री का मैटर है।उसे उतारकर पुस्तक
लिखा है। उसके चलते शैक्षणिक कदाचार ,सामग्री चोरी ,फोर्जरी,शैक्षणिक
भ्रष्टाचार आदि का कोई मामला नहीं बनता।अपने प्रिय चोरगुरू का संरक्षक बने
कुलपति विभूति नारायण राय भी 2009 से उसको उसी के बताये तर्क को तोते की
तरह दुहराते  हुए बचा रहे हैं।
इस चोर गुरू ने अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय ,रीवा (म.प्र.) के पाठ्य
पुस्तिका से सामग्री चुराकर पुस्तक अपने नाम बनवा लिया है और उसका लेखक
बन गया है, जिसको 2009 और 2010 में चोरगुरू नामक टीवी सिरियल में प्रमाण
सहित  दिखाया गया था। विश्वविद्यालय के तबके कुलपति यादव का साक्षात्कार
भी लिया गया था। जिसमें उन्होंने इसकी जांच कराकर चोरगुरू अनिल कुमार राय
के विरूद्ध केस दर्ज  करवाने के लिए कहा था।विश्वविद्यालय के वकील सुशील
कुमार तिवारी ने दिनांक 31-11-2009 को चोरगुरू डा.अनिल कुमार राय  को
नोटिस भी दिया था।उसके बाद से अब तक विश्वविद्यालय के तबके और उनके बाद वाले कुलपति व कुलसचिव
ने  कुछ भी नहीं किया है।  कुलपति ने उस समय पत्रकार संजय देव से चोरगुरू
अनिल कुमार राय की लिखी पुस्तक संचार के सात सोपान प्रमाण के तौर पर ली
थी। बताया जाता  है कि वह पुस्तक और संबंधित दो फाइल कुलसचिव के कार्यालय
से गायब हो गई है। संजय देव ने राज्यपाल,उच्च शिक्षा मंत्री,कुलपति को दिनांक 4 मार्च 2013 को दो पेज का पत्र और उसके साथ 3 पेज वकील तिवारी का पत्र भेजकर मामले की  जांच व कार्रवाई करने की मांग की है।लोकसभा सांसद राजेन्द्रसिंह राणा ने  दिनांक 29-01-13 को और सांसद देवराज सिंह पटेल ने दिनांक 10-01-13 को राज्य पाल,उच्च शिक्षा मंत्री और कुलपति को पत्र लिखकर इस मामले की जल्दी से जल्दी जांच
कराने की मांग की है । यदि जांच हो गई है तो उसकी रिपोर्ट देने को कहा है ।।लेकिन कुलपति और कुलसचिव महोदय उसपर कुंडली मारे बैठे हुए हैं, और यह करके चोरगुरू अनिल कुमार राय को बचा रहे हैं।
यह खबर स्टार समाचार, सतना , 19-09-2013 को पृष्ठ 8 पर छपी है । शीर्षक है - कुलपति,कुलसचिव बचा रहे हैं नकलची को http://216.15.194.91/epapermain.aspx
इसके अलावा अन्य कई समाचार पत्रों में भी छपी है।


sattachakra.blogspot.in
date 17-09-13,09.25P.M.

Friday, August 9, 2013

Dr Anil K. Rai Ankit Chorguru purchased honour from American Biographical Institute


Chorguru  Dr Anil K. Rai Ankit purchased honour from American Biographical Institute
choreguru sanrakshak chhinali vibhuti b.n.rai IPS
CHORGURU anil k.rai ankit

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New delhi .Chorguru  dr anil kumar rai had mentioned in his bio data submitted before Mahatma Gandhi Antarrashtriya Hindi  Vishwavidyalaya , Wardha , at the time of his appointment ,where he on  the seventh  page he had submitted ,in ‘honour’ in  column three  , that  he had received ‘ best millennium citizen award 2004 from American Biographical Institute, U.S.A. . This honour is purchased on paid basis  by Chorguru  Dr Anil Kumar Rai Ankit in 2004 when he was lecturer at VBS Purvanchal University Jaunpur (U.P.).
Although it may be legal to purchase such award but it is nothing but an attempt to fool people by mentioning bogus type of award  from America , in ones Bio data and obtain a reputed post of Professor in a central university (Mahatma Gandhi Antarrashtriya Hindi  Vishwavidyalaya , Wardha ) in India. This is just another example of other intellectual frauds of chorguru  dr anil kumar rai ankit, this also proves that this Chorguru is seriously involved in intellectual fraud and is saved by its Chorguru Sanrakshak ,  self  corrupt and protectors of corruption  who were his  vice chancellors from Jaunpur to Wardha till date.
However in the bio data provided by Kailash khamre registrar  Mahatma Gandhi Antarrashtriya Hindi  Vishwavidyalaya , Wardha , the copy of award  certificate is not enclosed rather a certificate of recognition is enclosed  that Chorguru  Dr Anil K. Rai Ankit.has been conferred with an honorary appointment to the research board of advisors to The American Biographical Institute (ABI).
The Wikipedia provides fallowing information about The American Biographical Institute (ABI)
The American Biographical Institute (ABI) is a paid-inclusion vanity biographical reference directory publisher based in Raleigh, North Carolina which has been publishing biographies since 1967.[1] It generates revenue from sales of certificates and books.
Its awards are frequently denounced as scams by politicians,[2][3] journalists,[4][5] and others.[6][7][8]
The ABI invites individuals to purchase various honors as a commemorative in their inclusion for a specific biography.[9] Such honors include "International Man of the Year," "Most Admired Man of the Decade" or "Outstanding Man of the 21st Century" (see list below), or to be included in ABI publications, such as 500 Leaders of Science[10] or The World Book of Knowledge,[11] in exchange for a contribution fee.[12] Those who accept, who sometimes write their own biographies,[13] are offered books or certificates at prices as high as US $795.[11]