Showing posts with label corrupt guru dr anil kumar upadhyay. Show all posts
Showing posts with label corrupt guru dr anil kumar upadhyay. Show all posts

Thursday, June 27, 2013

BHRASTACHARI GURU - 3,म.गां.काशी विद्यापीठ के रीडर डा.अनिल उपाध्याय ने वहीं के प्रोफेसर की पीएचडी थीसिस को कटपेस्ट करके लिखी है डीलिट की थीसिस



sattachakra.blogspot.in
यह खबर  , लोकमत , लखनऊ में 27- 06 - 2013 को छपी है। अन्य समाचारपत्रों में भी छपी है।


ANIL UPADHYAY
उ.प्र.के विश्वविद्यालयों के भ्रष्टाचारी गुरू व उनके संरक्षक-3
म.गां.काशी विद्यापीठ के रीडर डा.अनिल उपाध्याय ने वहीं के प्रोफेसर की
पीएचडी थीसिस को कटपेस्ट करके लिखी है डीलिट की थीसिस
प्रमाण सहित शिकायत के बावजूद राज्यपाल,कुलपति,कुलसचिव बचा रहे
भ्रष्टाचारी गुरू को,बना रहे हैं प्रोफेसर

-कृष्णमोहन सिंह
नईदिल्ली।महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी के पत्रकारिता विभाग के
रीडर , हेड डा. अनिल कुमार उपाध्याय ने इसी विश्वविद्यालय के महामना मदन

मोहन मालवीय पत्रकारिता संस्थान के प्रोफेसर ओम प्रकाश सिंह की पी.एचडी.
थीसिस , “संचार माध्यमों का प्रभाव” से पेज का पेज , काफी सामग्री हूबहू
नकल करके ,कटपेस्ट करके अपनी डी.लिट. की थीसिस “तीसरी दुनिया के आर्थिक
विकास में जनमाध्यमों की भूमिका” बना ली है। हालत यह है कि उपाध्याय ने
ओम प्रकाश की थीसिस से सामग्री के अलावा दूसरे चैप्टर का पूरा रिफरेंस भी
हूबहू उतारकर  अपने डीलिट थीसिस में लगा दिया।  ओमप्रकाश सिंह ने काशी
हिन्दू वि.वि. ,वाराणसी से प्रो.हरिहर नाथ त्रिपाठी के निर्देशन में 1988
में पी.एचडी.उपाधि हेतु शोध-प्रबंध (थीसिस) लिखा व जमा किया था।जिस पर
उनको पी.एचडी. की उपाधि मिली। अनिल कुमार उपाध्याय ने 1996 में महात्मा
गांधी काशी विद्यापीठ,वाराणसी से 1996 में डी.लिट.उपाधि हेतु शोध
प्रबंध(थीसिस) लिखा (नकल करके) था। जिसपर  उनको वहां से डी.लिट. की उपाधि
मिली।
   डा. अनिल कुमार उपाध्याय  ने  ओम प्रकाश सिंह की पी.एचडी. थीसिस के
पेज 55 की सामग्री उतारकर अपने डी.लिट. थीसिस का पेज 75, पेज 56 की
सामग्री उतारकर पेज76, पेज 57 की सामग्री व चार्ट उतारकर पेज 77,78, पेज
58 की सामग्री व चार्ट उतारकर पेज 78,79, पेज 59 की सामग्री उतारकर पेज
80,पेज 77 की सामग्री व चार्ट उतारकर पेज 142,पेज 78 की सामग्री उतारकर
पेज143,पेज 79 की सामग्री व चार्ट हूबहू उतारकर पेज 144 बनाया है।
  कटपेस्ट करके डी.लिट. थीसिस लिखने का प्रमाण 2009 में ही उजागर होने और
उसके बाद लगातार लिखित शिकायत किये जाने के  बाद भी राज्यपाल उ.प्र.,
कुलपति व कुलसचिव काशी विद्यापीठ ने अब तक  अनिल उपाध्याय की डी.लिट की
डिग्री रद्द करके उनको रीडर पद से बर्खास्त नहीं किया है। और उनको नकल
करके लिखी डी.लिट.थीसिस , डी.लिट. डिग्री,उसको पुस्तक के रूप में छपवाने
आदि  शैक्षणिक भ्रष्टाचार,दुराचरण  का लाभ देकर, पुरस्कार के तौर पर
पदोन्नति देकर पहले रीडर बनाया गया,अब प्रोफेसर बनाया जा रहा है।

Sunday, June 23, 2013

chorguru anil upadhyay ne o.p. singh ki kitab se katpest karake kaise likhi hai d.lit thesis/ kitab

sattachakra.blogspot.com
23-06-2013, 10.15 , a.m.

corrupt guru dr. anil upadhyay
 corrupt guru's protector vc dr. prithvish NAG
-के.एम.एस
नईदिल्मली।हात्मा गांधी काशी विद्यापीठ,वाराणसी  के पत्रकारिता विभाग  के रीडर , हेड , चोरगुरू ,शैक्षणिक कदाचारी  डा. अनिल कुमार उपाध्याय ने इसी विश्वविद्यालय के महामना मदन मोहन मालवीय पत्रकारिता संस्थान के प्रोफेसर ओम प्रकाश सिंह की पीएचडी थीसिस से पेज के पेज, काफी  सामग्री हूबहू कटपेस्ट करके अपनी डीलिट की थीसिस लिखी। और एशिया में पत्रकारिता में पहला डीलिट होने का दावा करने लगे । लेकिन कत्तई यह दावा नहीं किया कि इस डीलिट की थीसिस की ज्यादेतर सामग्री किसी और के पीएचडी थीसिस से हूबहू नकल करके उतार दिया है। कटपेस्ट करकेडीलिट थीसिस बनाया है।और इसकी पुस्तक  भी छपवा लिया है।नकल करके , कटपेस्ट करके बनाई गई इस पुस्तक का नाम है  "पत्रकारिता एवं विकास संचार "। प्रो. ओम प्रकाश सिंह ने भी अपनी पीएचडी थीसिस को पुस्तक के रूप में छपवाई है जिसका नाम है "संचार माध्यमों का प्रभाव "। यहां पहले यह प्रमाण  दिया  जा रहा कि ओमप्रकाश सिंह की पुस्तक "संचार माध्यमों का प्रभाव" के किस पेज से  किस पेज तक की सामग्री डा. अनिल उपाध्याय की पुस्तक "पत्रकारिता एवं विकास संचार" के किस पेज से किस पेज तक है। इसके बाद एक तरफ ओमप्रकाश की पुस्तक का पेज , दूसरी तरफ डा. अनिल उपाध्याय की पुस्तक का वही कटपेस्ट का प्रमाण वाला पेज दिया जायेगा। उसके बाद ओमप्रकाश की पीएचडी थीसिस का पेज और उसको कटपेस्ट करके अनिल उपाध्याय ने अपनी डीलिट का जो पेज बनाया है उसे आमने -सामने दिया  जायेगा। ताकि डा. अनिल कुमार उपाध्याय के नकलचेपी,शैक्षणिक कदाचार का प्रमाण विश्वविद्यालयों के छात्रों, कर्मचारियों , अध्यापकों,आम जनता व धृतराष्ट्र बनकर इस शैक्षणिक कदाचारी को बचा रहे ,प्रोमोशन दे रहे कुलपति पृथ्वीश नाग, कुलसचिव साहब  लाल मोर्या , राजभवन उ.प्र. के आला अफसर व उनके आका , यूजीसी के आला अफसर व उनके आका बार -बार देख सकें  और यह सब भ्रष्टाचारी गुरू अनिल उपाध्याय की डीलिट डिग्री रद्द करने , उनके विरूद्ध कड़ी कार्रवाई का कुछ आधार बन सके।  
       तो पहले देखें ओमप्रकाश की पुस्तक के पेज और चोरगुरू अनिल उपाध्याय की पुस्तक के पेज का चार्ट (3 पेज )जो साबित करता है कि चोरगुरू ,शैक्षणिक कदाचारी   डा. अनिल कुमार उपाध्याय ने कटपेस्ट करकेकिताब बनाया है। अनिल उपाध्याय की पुस्तक  का पहला संस्करण 2001 में, दूसरा संस्करण 2007 में छपा है। दोनों में डा. अनिल  कुमार उपाध्याय द्वारा किये गये नकलचेपी कारनामे का प्रमाण चार्ट में है।