Saturday, March 9, 2013

RASTRAPATI DADA KYA BHRASTACHAR AAROPI PRO ASALAM KO IGNOU KA KULAPATI BANAYENGE



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 प्रणव दा क्या भ्रष्टाचार आरोपी असलम को इग्नू के कुलपति पद पर नियुक्ति की मंजूरी देंगे

-कृष्णमोहन सिंह
नईदिल्ली। राजशेखरन पिल्लई पर तो इंदिरागांधी राष्ट्रीय खुला विश्वविद्यालय (इग्नू) के कुलपति पद पर रहने के दौरान तरह-तरह के भ्रष्टाचार,शैक्षणिक कदाचार ,घोटाले करने के मामले में सीबीआई जांच चल रही है। उनके विदा होने के बाद इग्नू के कार्यकारी कुलपति रहे और अब कभी भी पूर्णकालीक कुलपति नियुक्त कर दिये जाने वाले प्रो.असलम  के विरूद्ध भी कई घोटालों के मामले में दिल्ली के नेब सराय थाने में एफआईआर दर्ज हो गई है। इग्नू के ही प्लानिंग एंड डवलपमेंट डिविजन के डिप्टी डायरेक्टर आर.सुदर्शन ने यह एफआईआर दर्ज कराई है।जिसमें है कि प्रो. असलम ने इग्नू का कार्यकारी कुलपति रहने के दौरान कई घोटाले किये हैं( जिसमें कुछ के बारे में नाम सहित बताया गया है) , उनको कार्यकारी कुलपति का कार्यभार दिया जाना इग्नू के स्टेट्यूट के विरूद्ध था और यह मामला दिल्ली उच्च न्यायालय में चल रहा है। 
 कहा जाता है कि प्रो. असलम के विरूद्ध मामला दिल्ली उच्चन्यायालय में चलने और उनपर घोटालों के आरोप के बावजूद इग्नू के कुलपति पद के लिए सुयोग्य उम्मीदवार तलाशने के लिए बनाई गई दूसरी स्क्रीनिंक कमेटी ने बहुत तथाकथित मेहनत व ईमानदारी से देश भर के विद्वान,ईमानदार,योग्य व्यक्तियों को तलाशा तो उसमें से उनको केवल तीन नाम सबसे उत्तम मिले। ये तीन नाम थे- प्रो. ढांडे,दीपांकर और प्रो.असलम।कहा जाता है कि इसमें प्रो. ढांडे को मानवसंसाधन विकास मंत्रालय में तैनात उ.प्र. कैडर के एक आईएएस अफसर के अलावा कानपुर संसदीय क्षेत्र के सांसद व केन्द्रीय कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल का , दीपांकर को वामपंथियों का और प्रो. असलम को केन्द्रीय मंत्री गुलामनबी आजाद का वरदहस्त प्राप्त है।बताया जाता है कि  इन तीन नामों को देखने के बाद जब मानवसंसाधन विकास मंत्रालय के कुछ ईमानदार अफसरों ने  मंत्री पल्लम राजू को सुझाव दिया कि सर,इस कमेटी को रिजेक्ट करके एक नई कमेटी बना दीजिए।क्यों इसने जो नाम दिया है उसमें से कोई भी इग्नू जैसी संस्था का कुलपति बनने के लायक नहीं है। ढांडे के निदेशक रहते  आईआईटी कानपुर में सबसे अधिक छात्रों ने आत्महत्या किया है। यह रिकार्ड पूरे भारत के आआईटी में सबसे अधिक है। उनपर और भी तरहके भ्रष्टाचार के आरोप हैं।इसी तरह प्रो.असलम के विरूद्ध भी भ्रष्टाचार आदि के आरोप हैं। चर्चा है कि मंत्री पल्लम राजू ने अपने ईमानदार अफसरों की बात नहीं मानकर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद और एक-दो अन्य  चर्चित मुस्लिम नेताओं को खुश करने के लिए  केवल प्रो. असलम का नाम इग्नू के कुलपति पद के लिए राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के यहां भेजवा दिया है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही  प्रो.असलम इग्नू के कुलपति हो जायेंगे। प्रणव मुखर्जी के राष्ट्रपति बनने और राष्ट्रपति भवन में देशभर के केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों , केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय के पूरे अमले को बुलाकर , बैठक कराकर , शिक्षा के सुधार को गति देने ,इसमें फैले भ्रष्ट्राचार को मिटाने,शिक्षा माफिया की तरह काम कर रहे कुछ प्रोफेसरों, पदाधिकारियों आदि के रैकेट को तोड़ने की बात कही उससे ईमानदार छात्रों, शिक्षकों व जनता को उम्मीद जगी है। देखिये अब प्रणव दा , भ्रष्टाचार आरोपी प्रो.असलम को इग्नू का कुलपति बनाते हैं या  पुनर्विचार का रिमार्क लगाकर फाइल मानवसंसाधन विकास मंत्रालय को लौटा देते हैं। वाजपेई सरकार के समय बीएचयू का कुलपति नियुक्त करने के मामले में ऐसा हो चुका है। राष्ट्रपति ने फाइल लौटा दिया तो मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने पहले जो नाम भेजा था उसे हटा दिया ,नई कमेटी बनाई ,उसने जो नये नाम सुझाये उसमें से नाम राष्ट्रपति को भेजा गया।