Saturday, December 15, 2012

BHRASTACHAR AROPI E. HASNAIN KO UGC CHAIRMAN BANANE KI TAIYARI



भ्रष्टाचार आरोपी हसनैन को विजिलेंस क्लियरेंस दिला यूजीसी अध्यक्ष बनाने की तैयारी

-कृष्णमोहन सिंह
नईदिल्ली। जिस  प्रो.सैयद ई हसनैन पर भ्रष्टाचार के तमाम आरोप लगे हैं , जिनके भ्रष्टाचार  के बारे में प्रमाण सहित आरोप पत्र सीवीसी और मानव संसाधन विकास मंत्रालय में  देकर जांच कराने की मांग हुई, लेकिन उस पर दो साल तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। और अब बिना जांच किये ही हसनैन को एक तरह से सेफ पैसेज देकर ऊपरी दबाव के चलते विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का अध्यक्ष बनाने की तैयारी हो रही है।  इसबारे में अरविंद केजरीवाल के साथ   परिवर्तन नामक संस्था शुरू करने वाले कैलाश गोदुका ने  5 दिसम्बर 2012 को मानव संसाधन विकास मंत्री और  और मंत्रालय के चीफविजिलेंस अफसर को पत्र लिख कर हसनैन के विरूद्ध 2 साल से  जांच दबाये रखने और अब आनन-फानन में उनकी यूजीसी अध्यक्ष पद पर नियुक्ति का रास्ता साफ करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। गोदुका ने पत्र में लिखा है- हैदराबाद विश्वविद्यालय के  कुलपति रहने के दौरान प्रो.सैयद ई.हसनैन पर गैरकानूनी तरीके से नियुक्तियां करने, अन्य तमाम घोटाले करने के  आरोपों की जांच के लिए सेन्ट्रल विजिलेंस कमिसन ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय में भेजा था। जो मंत्रालय को 20 अक्टूबर 2010 को प्राप्त हुआ था।  हसनैन पर आरोप है कि उन्होंने कुलपति रहने के दौरान अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में बहुतसी नियुक्तियां की।
 सेन्ट्रल विजिलेंस कमिसन द्वारा जांच के लिए भेजा गया एक और पत्र दिनांक 18 जुलाई 2011 को मानव संसाधन विकास मंत्रालय को प्राप्त हुआ था। जिसमें हैदराबाद में कुलपति रहने के दौरान प्रो. सैयद ई.हसनैन पर लगे भ्रष्टाचार के तमाम आरोपों के  बावजूद उनको गैरकानूनी तरीके से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) का सदस्य नामांकित किये जाने की जांच करने के लिए लिखा गया था।  कैग (C AND AG ) ने भी अपनी आडिट रिपोर्ट 2009-10 के पैरा 4.13 में  , हैदराबाद विश्वविद्यालय का कुलपति रहने के दौरान सैयद ई.हसनैन द्वारा लगभग 3 दर्जन लेक्चररों और 2 दर्जन रीडरों को अग्रिम इन्क्रीमेंट दे देने की धांधली को उजागर किया है। इस मामले में  भी जांच कराने और गैरकानूनी तरीके से लाभान्वितों को लाभ पहुंचाने वाले के खिलाफ कार्रवाई करने, इन्क्रीमेंट रद्द करके लाभान्वितों से रकम वसूली की कार्रवाई करने की मांग हुई थी।  सैयद ई. हसनैन पर भ्रष्टाचार का यह भी आरोप लगा है कि उन्होंने हैदराबाद विश्वविद्यालय का कुलपति रहने के दौरान एक जगह की यात्रा की समयावधिपर एक से अधिक स्थानों की हवाई जहाज यात्रा का यात्रा भत्ता लिया है।  सैयद ई.हसनैन पर भ्रष्टाचार के इतने आरोपों की दो सालों से नतो जांच हुई नहीं कोई कार्रवाई । यह करके आरोपी को बचाते रहने में मंत्रालय के कुछ अफसरों  का हाथ बताया जाता है।
सूत्रों का कहना है कि मंत्रालय के  विजिलेंस विभाग और सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी ब्यूरो के आला अफसरों ने दो साल तक फाइल को दबाये रख हसनैन को बचाते रहने के बाद अब बिना चार्ज फ्रेम किये ही एक रिपोर्ट बना ली है । जो जल्दी ही सचिव ,मानव संसाधन विकास मंत्रालय को दे दी जायेगी।मालूम हो कि हसनैन हैदराबाद विश्वविद्यालय से 3 माह के दो सेवाविस्तार के बाद मार्च 2011में सेवामुक्त हुए तो जुगाड़ लगाकर  आईआईटी दिल्ली में प्रोफेसर हो गये।बताया जाता है कि जांच नहीं होने और चार्ज फ्रेम नहीं किये जाने को आधार बनाकर भ्रष्टाचार आरोपी सैयद ई हसनैन का एक तरह से विजिलेंस क्लियरेंस मान कर उनका नाम यूजीसी चेयरमैन के लिए क्लियर करने की तैयारी चल रही है।
* यह खबर पंजाब केसरी, दिल्ली में दिनांक 14 दिसम्बर 2012 को पेज 4( संपादकीय पेज) पर छपी है।

Tuesday, December 4, 2012

TATA,AMBANI,AHEMAD YA MONTEK KA ADAMI BANEGA UGC CHAIRMAN


SATTACHAKRA
टाटा, अंबानी ,अहमद या मोंटेक का आदमी बनेगा यूजीसी अध्यक्ष 
अहमद पटेल ने भ्रष्टाचार आरोपी सैयद हसनैन को यूजीसी अध्यक्ष बनाने के लिए पूरा जोर लगा दिया है
-कृष्णमोहन सिंह
नईदिल्ली।विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी यानी यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन ) का अध्यक्ष कौन बनेगा , टाटा के आदमी परशुरमन, मुकेश अंबानी के आदमी पंकज चंद्रा, अहमद पटेल के आदमी सैयद हसनैन या मोंटेक सिंह अहलूवालिया के आदमी अनंत ? विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष पद के लिए जो खोज समिति बनी थी उसने खोज कर,साक्षात्कार लेकर इस पद के लायक  5 नाम की सूची बनाई है । नाम हैं- प्रो.वेद प्रकाश, परशुरमन, पंकज चंद्रा, सैयद हसनैन , अनंत । यह काम दूसरी बार करना पड़ा है। क्योंकि इसके पहले जो खोज कमेटी बनी थी उसने कई योग्य उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया ही नहीं और केवल दो महाजुगाड़ियों  के नाम ( भ्रष्टाचार आरोपी हसनैन व एक अन्य)की सूची बनाकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय के संबंधित अफसर को दे दिया। जिस पर विवाद हुआ तो फिर से दूसरी सर्च कमेटी बनानी पड़ी। जिसने 5 नाम दिया है। अब मानव संसाधन विकास मंत्रालय को इनमें से किसी एक को यूजीसी अध्यक्ष बनाने की घोषणा कर देनी है। कहा जाता है कि जिसका पौवा भारी होगा वही अध्यक्ष बनेगा। हैदराबाद के एक विश्वविद्यालय का कुलपति रहने के दौरान हसनैन पर घोटालों के तमाम आरोप लगे हैं। उनपर घनघोर मुस्लिमवादी होने का भी आरोप है। चर्चा है कि वह यह कहते घूम रहे हैं कि उनपर सोनिया के खास अहमद पटेल का बरदहस्त है, और मामला अल्पसंख्यक का है, मनमोहन सरकार अल्पसंख्यकों और दलितो ( विशेषकर विवादास्पद व भ्रष्टाचार आरोपियों) को बहुत तरजीह दे रही है। और जो नये मानव संसाधन विकास मंत्री बने हैं पल्लम राजू वो तो आंध्र प्रदेश के हैं जिसकी राजधानी हैदराबाद में कुलपति रहा हूं।  सो उनको(सैयद  हसनैन) इसबार यूजीसी का अध्यक्ष बनने से कोई नहीं रोक सकताहसनैन इसलिए भी उत्साहित हैं क्योंकि इसके पहले दलित थोराट यूजीसी के चेयरमैन थे। जिसके समय में यूजीसी में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार और जातिवाद बढ़ने का आरोप है। जिसने अपनी जाति के तमाम चहेते आरोपियों को यूजीसी में बड़े-बड़े पदों पर नियुक्त कराया,प्रोजेक्ट दिलाया। यूसीसी सेक्रेटरी पद पर तो उसने दो टर्म तक दो दलितों को बिना नियुक्ति के एक्टिंग सेक्रेटरी रखकर ही काम चलाया।उसके बाद इसी तरह से निलोफर काजमी को एक्टिंग सेक्रेटरी बना दिया गया। जिसको सेक्रेटरी पद पर नियुक्त कराने के लिए हसनैन व थोराट(यूजीसी के चेयरमैन पद से हटने के बाद दलित सांसदों से सोनिया गांधी के यहां लाबिंग कराकर इंडियन काउंसिल आफ सोसल साइंसेज रिसर्च का अध्यक्ष बन गये हैं) लगा गोलबंद हो गये थे। सेक्रेटरी पद पर निलोफर की नियुक्ति नहीं हुई तो उन्होंने  कई जगह शिकायत किया कि सेलेक्शन कमेटी में अल्पसंख्यक सदस्य नहीं रखा गया। जिसकी जांच के लिए  एक कमेटी बनी थी जिसमें हसनैन थे। कहा जाता है कि हसनैन ने जांच को जितना हो सके अधिक दिनों तक खींचने की हर संभव कोशिश किया।असत्य तर्क देते रहे कि नियम के अनुसार 10 से कम पदों के साक्षात्कार  के सेलेक्शन कमेटी में अल्पसंख्यक सदस्य होना ही चाहिए। जब उनसे इस नियम की कापी दिखाने को कहा गया तो वह कहे कि जहां ठहरे हैं उस कमरे में बैग में है। जब वहां से लाकर दिखाने को कहा गया तो इधर-उधर करने के बाद कहने लगे कि नहीं मिल रहा है। इसतरह वह कमेटी को गुमराह करने की कोशिश करते रहे। क्योंकि नियम के अनुसार बहुत कम पदों के साक्षात्कार में अल्पसंख्यक सदस्य का रखा जाना जरूरी नहीं है। निलोफर काजमी की तरफदारी में थोराट और हसनैन दोनों ने मिलकर जितना हो सका लाबिंग किया । लेकिन यूजीसी सेक्रेटरी के सेलेक्शन के लिए दूसरी बार बनी कमेटी ने 22अक्टूबर 2012 की बैठक में, निलोफर काजमी ने प्रो.वेद प्रकाश के खिलाफ जो भी आरोप लगाये थे सबको आधारहिन बताते हुए खारिज कर ,काजमी को सेक्रेटरी पद से हटा दिया । और वैज्ञानिक अखिलेश गुप्ता को सेक्रेटरी पद के लिए चुन लिया। गुप्ता के बाद दूसरे नम्बर पर नाम नेहू के प्रोफेसर नजमा अख्तर का था। यह हालत है हसनैन थोराट मंडली की ।  पंकज चंद्रा उस एक प्रबंध संस्थान के निदेशक हैं जिसके चेयरमैन मुकेश अंबानी हैं।वह मुकेश अंबानी के सहयोग से यूजीसी अध्यक्ष बनने की कोशिश कर रहे हैं। मुकेश अंबानी जल्दी ही शिक्षा के धंधे में उतरने वाले हैं और देश का सबसे बड़ा निजी विश्वविद्यालय बनाने वाले हैं । परशुरमन टाटाइंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंसेज के प्रमुख हैं। योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया के यसमैन हैं अनंत। मोंटेक ने इनको सांख्यिकी मंत्रालय  चीफ स्टैटिसियन नियुक्त करा रखा है। और अब उनको अपने आका मनमोहन सिंह की कृपा से यूजीसी चेयरमैन बनवाने पर आमादा हैं।  प्रो.वेद प्रकाश यूजीसी के वाइस चेयरमैन हैं और लगभग डेढ़ साल से अपने कमरे में बैठ कर चेयरमैन का काम भी देख रहे हैं।   देखिए इन 5 में से किस पर सोनिया मनमोहन सरकार और उसके नये मानव संसाधन विकास मंत्री की कृपा होती है।
यह खबर "पंजाब केसरी" ,दिल्ली में 2दिसम्बर 2012 को पेज 3 पर कुछ काट छांट कर छपी है।

Saturday, December 1, 2012

CHORGURU DEEPAK KEM IIIT ALLAHABAD KE DEPUTY REGISTRAR PAD SE BARKHAST


sattachakra
आईआईआईटी इलाहाबाद के डिप्टी रजिस्ट्रार पद की नौकरी से निकाले गये चोरगुरू डा. दीपक केम
-कृष्णमोहन सिंह
CHORGURU Dr.Deepak Kem
नईदिल्ली। नकल करके कई पुस्तकें लिखने वाले डा.दीपक केम ( इसने एक पुस्तक अपने यार चोर गुरू डा.अनिल के. राय अंकित के साथ मिलकर लिखा है, जो इस समय छिनाली फेम वाले पुलिस अफसर व  जुगाड़ लगाकर कुलपति बने विभूति नारायण राय की कृपा से म.अं.हि.वि.वि.वर्धा में प्रोफेसर है)का नकलचेपी मामला उजागर होने और प्रमाण सहित लिखित शिकायत मिलने पर, जांच कराकर  जामिया मिलिया इस्लामिया,दिल्ली ने उनको रीडर पद से बर्खास्त कर दिया। लेकिन वहां से बर्खास्त होने और दिल्ली हाईकोर्ट में मुकदमा हार जाने के बाद डा. दीपक केम ने अपने पिता टीआऱ केम के साथ यूजीसी में काम किये आईआईआईटी इलाहाबाद के निदेशक डा.एमडी तिवारी की कृपा से आईआईआईटी इलाहाबाद में जुलाई 2012 के मध्य में डिप्टी रजिस्ट्रार पद पर नियुक्त हो गये। जिसके बारे में सितम्बर 2012 के तीसरे सप्ताह में कई अखबारों में छपने और मानव संसाधन विकास मंत्री के यहा सांसदों व अन्य द्वारा शिकायत व जांच की मांग के बावजूद एमडी तिवारी उसको बचाते रहे,अक्टूबर 2012 तक उसको बचाये , तनख्वाह दिये।लेकिन जब सांसदों ने इस बारे में फिर से मंत्री,प्रधानमंत्री और सीधे आईआईआईटी इलाहाबाद के निदेशक को कड़ा पत्र लिख चोरगुरू डा.दीपक केम को नियुक्त करने और बचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की , तब जाकर जल्दी ही सेवानिवृत होने वाले और फिर से मालदार पद के लोभ में जुगाड़ लगा रहे एमडी तिवारी ने अपना गला बचाने के लिए डा.दीपक केम की नियुक्ति रद्द की।इस बारे में सांसद हर्षवर्धन ने जो पत्र लिखा  और उसके बाद एमडी तिवारी ने जो जबाव दिया , वे निम्न हैं- 

निदेशक                       29 अक्टूबर 2012
आईआईआईटी इलाहाबाद
देवघाट,झालवा
इलाहाबाद-211012

विषय-इंटरनेट से सामग्री चोरी करके अपने नाम से किताबें छपवाने वाले व इसके चलते जामिया मिलिया इस्लामिया,दिल्ली से रीडर पद से बर्खास्त व दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा बर्खास्तगी को जायज ठहराने के बाद भी डा.दीपक केम को डिप्टी रजिस्ट्रार पद पर नियम विरूद्ध नियुक्ति के संबंध में ।
महोदय,
     मैं आपके संज्ञान में लाना चाहता हूं कि डा. दीपक केम जिन्हें वर्तमान में डिप्टी रजिस्ट्रार,आईआईआईटी ,इलाहाबाद के पद पर नियुक्त किया गया है के विरूद्ध कई अनियमितताएं हैं। देशी-विदेशी लेखकों की पुस्तकों व शोध सामग्री को हूबहू चुराकर अपने नाम किताबें प्रकाशित कराने पर इन्हें जामिया मिलिया इस्लामिया,दिल्ली के रीडर पद से 13 जून 2011 को बर्खास्त कर दिया गया था।डा.दीपक केम इसके विरूद्ध दिल्ली उच्च न्यायालय गए। उनकी याचिका की सुनवाई करने के उपरांत बर्खास्तगी को न्यायालय ने सही ठहराया। इससे असंतुष्ट डा.केम ने दो जजों की पीठ के समक्ष पुन:याचिका प्रस्तुत की। दो जजों की पीठ ने भी 10 अप्रैल 2012 को एकल पीठ के फैसले को सही तो ठहराया ही,डा.दीपक केम के कृत्य को कत्तई क्षमा योग्य न होने की बात भी कही। साथ ही शैक्षणिक संस्थाओं में इस तरह के चोर गुरूओं की नियुक्ति पर  चिंता भी जाहिर किया।
 यह अत्यंत आश्चर्य जनक है कि तमाम घोटालों के आरोपी डा.दीपक केम को दिल्ली हाई कोर्ट के इस फैसले के लगभग 3 माह बाद  जुलाई 2012 के मध्य में आईआईआईटी इलाहाबाद में डिप्टी रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्त कर दिया गया।
 डा.दीपक केम के पिता टीआर केम ( यूजीसी की एक ईकाई ,सीईसी में निदेशक हैं) और आईआईआईटी इलाहाबाद के निदेशक डा. मुरलीधर तिवारी के साथ यूजीसी में काम किये हैं। कहा जाता है कि इलाहाबाद के निदेशक डा.मुरलीधर तिवारी ने दीपक केम के बारे में सब कुछ जानते हुए भी जिप्टी रजिस्ट्रार पद पर नियुक्त कराया।
 मुझे आश्चर्य है कि इतने गम्भीर आरोपों के बाद भी डा. दीपक केम की नियुक्ति कैसे की गई ? आपसे आग्रह है कि इस मामले में जांच कराकर इस फर्जीवाड़े में नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का कष्ट करें।
 कृत कार्रवाई से मुझे भी अवगत कराएं।
भवनिष्ठ
हर्षवर्धन
इस प्रत्र की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और मानव संसाधन विकास मंत्री के यहां भी 29 अक्टूबर 2012 को दे दी गई।
चोर गुरू डा.दीपक केम की नियुक्ति को रद्द करने के लिए इसके पहले कैलाश गोदुका और सांसद राजेन्द्र सिंह राणा ने भी मानव संसाधन विकास मंत्री को पत्र लिखा था।जिसकी खबर इस अखबार में सितम्बर 2012 के तीसरे सप्ताह में छपी थी।अरविंद केजरीवाल के साथ मिलकर परिवर्तन संस्था शुरू करने वाले कैलाश गोदुका ने आईआईआईटी इलाहाबाद के निदेशक को भी  दीपक केम की नियुक्ति की जांच कराने और नियुक्ति रद्द करने के लिए 31 अक्टूबर 2012 को पत्र लिखा।
इस सबका परिणाम यह हुआ कि अपने धत्कर्म का खुलासा हो जाने और चारो तरफ से घिर जाने के चलते आईआईआईटी इलाहाबाद के निदेशक डा.मुरलीधर तिवारी ने अपना गला बचाने के लिए डा.दीपक केम की नियुक्ति  5 नवम्बर 2012 को रद्द कर दिया।
और इसके बारे में सांसद हर्षवर्धन को 17-11-2012 को निम्न पत्र लिख कर सूचित किया-
आदरणीय महोदय,
  आपका पत्रांक VIP/MP/HV/2012-294  दिनांकित  29/10/2012 जो डा. दीपक केम को हमारे संस्थान में डिप्टी रजिस्ट्रार पद पर नियुक्ति से संबंधित है प्राप्त हुआ। आपके पत्रानुसार इस प्रकरण में उचित जांच की गई और डा. दीपक केम को दिनांक    05.11.2012  के दिन से हमारे संस्थान से अवमुक्त कर दिया गया है।
 सादर,
भवदीय,
(मुरलीधर तिवारी)
यह समाचार स्वदेश,इंदौर में दिनांक 30नवम्बर2012 को पेज 5 पर छपा है ।

Tuesday, November 27, 2012

sattachakra
जामिया वि.वि. से बर्खास्त चोरगुरू दीपक केम बना आई.आई.आई.टी. इलाहाबाद में डिप्टी रजिस्ट्रार
अप्रैल में दिल्ली हाइकोर्ट ने दीपक केम की बर्खास्तगी जायज ठहराया, जुलाई में हो गये इलाहाबाद में स्थापित
यह जानते हुए भी आईआईआईटी इलाहाबाद के निदेशक मुरली धर तिवारी ने किया यह कारनामा
आई.आई.आई.टी. इलाहाबाद के निदेशक मुरली धर तिवारी और दीपक केम के पिता टी.आर.केम ने यूजीसी में एक साथ काम किया है

- कृष्णमोहन सिंह
नई दिल्ली। मैटर चुरा कर किताब लिखने का आरोप सिद्ध होने पर दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया वि.वि. ने अपने जिस रीडर दीपक केम को सेवा से बर्खास्त किया, दिल्ली उच्च न्यायालय ने जिन केम साहब की बर्खास्तगी को उचित ठहराया, उन्हीं दीपक केम को इलाहाबाद के आई.आई.आई.टी. में डिप्टी रजिस्ट्रार पद पर नियुक्त कर दिया गया है।
Dr. DEEPAK KEM
पिछले साल पहली अप्रैल को जामिया मिलिया की कार्यकारी परिषद ने दीपक की बर्खास्तगी का फैसला किया, रीडर पद से 13 जून 2011 को वह बर्खास्त हो गये, उनकी अपील को हाई कोर्ट के दो जजों की पीठ ने 10 अप्रैल 2012 को खारिज करते हुए एक जज के फैसले को सही ठहराया। लेकिन कमाल देखिए, ढाई माह बाद ही दीपक केम आई.आई.आई.टी. में डिप्टी रजिस्ट्रार बन गये। सूत्रों के अनुसार इस नियुक्ति में उनके रसूखदार पिता टी.आर.केम और उनके साथ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यू.जी.सी.) में काम कर चुके तथा इस समय आई.आई.आई.टी. इलाहाबाद के निदेशक मुरली धर तिवारी की दोस्ती का अहम रोल है।
Dr M.D.TIWARI
दीपक केम की इस नियुक्ति के बारे में आई.आई.आई.टी. के एक वरिष्ठ अधिकारी ने फोन पर हुई बातचीत में बताया कि दीपक केम ने जुलाई 2012 मध्य में डिप्टी रजिस्ट्रार पद पर ज्वाइन किया है। यह पूछने पर कि क्या आपको मालूम है कि दीपक केम पर नकल करके पुस्तक अपने नाम छपवाने का आरोप साबित हुआ है और इसके चलते ही उनको जामिया मीलिया वि.वि. से रीडर पद से 13 जून 2011 को बर्खास्त कर दिया गया तथा इस बर्खास्तगी को उच्च न्यायालय के दो जजों की बेंच ने भी उचित बताया है। इस पर उस अधिकारी ने अनभिज्ञता जताई।
दिल्ली उच्च न्यायालय का फैसला इस लिंक पर कोई भी देख सकता हैः http://indiankanoon.org/doc/3836253 लेकिन इसकी फुर्सत आई.आई.आई.टी. के अधिकारियों को कहाँ। चोरगुरू डा.दीपक केम की बर्खास्तगी को सही कहते हुए उच्चन्यायालय ने फैसले में लिखा है कि अपील कर्ता (दीपक केम ) ने अन्य के परिश्रम को अपना (कार्य) बताया है। कहीं भी यह कृत्य, विशेषकर जामिया में वह जिस पद पर वह रहे, कतई क्षमा योग्य नहीं है। इसके लिए एक मात्र दंड उनकी सेवा समाप्त करना था।
न्यायालय ने दीपक केम बनाम जामिया मिलिया मामले में 10-04-12 को दिये फैसले में दीपक केम की बर्खास्तगी को जायज करार देते हुए प्लेजिएरिज्म पर “मार्क ट्वेन” को भी कोट किया है। मार्क ट्वेन ने कहा है-NOTHING IS OURS BUT OUR LANGUAGE, OUR PHRASING. IF A MAN TAKES THAT FROM ME (KNOWINGLY,PURPOSELY) HE IS A THIEF. यानी हमारी भाषा-शैली-मुहावरों के अलावा तो हमारा कुछ भी नहीं और जो भी जानबूझ कर हमसे वह छीनता है, वह चोर है
इस सिलसिले में यह जानना भी रोचक होगा कि तमाम घोटालों के आरोपी और दीपक केम के पिता टी.आर.केम इस समय यूजीसी की एक ईकाई, सी..सी.        (कन्सोर्टियम फार एजुकेशन कम्यूनिकेशन), अरूणा आसफ अली मार्ग,नई दिल्ली में निदेशक हैं और अढ़ाई माह बाद 5 साल का कार्यकाल पूरा होने के चलते विदा होने वाले हैं। लेकिन उस पद पर और पाँच साल, अपनी उम्र के 70 साल ,तक बने रहने के लिए तरह-तरह की तिकड़म में जुटे हैं, राजनीतिक दबाव का इस्तेमाल कर रहे हैं। इतना ही नहीं, बड़े केम साहब ने अपने इस 'चोर-गुरू' पुत्र को अपनी संस्था सी..सी. के अधीन काम करने वाले ई.एम.आर.सी.     (एजुकेशनल मल्टी मीडिया रिसर्च सेंटर), रूड़की में प्रोफेसर / निदेशक नियुक्त कराने की भी तैयारी कर ली थी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की अनुमति के बिना ही 2 जुलाई 2012 को विज्ञापन निकलवा कर अपने लड़के दीपक केम का नाम स्क्रीनिंग कमेटी से पास करा लिया था। 13 अगस्त 2012 को साक्षात्कार करवाने, उसका सेलेक्शन करवाने, उस पर 14 को सी..सी. की बोर्ड की बैठक में सहमति की मुहर लगाने का इंतजाम कर लिया था। इसके बारे में शिकायत मिलने पर यूजीसी ने सेवानिवृत होने के पहले 9 पदों पर अपनों को भरने की योजना बना लिये डा.तिलक राज केम की  पहल पर रोक लगा दी है।और उनसे दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा कि कितने पदों के लिए कब विज्ञापन निकाले,ये पद कब खाली हुए, किस तारीख को कौन सा पद खाली हुआ , पद अनुसार आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख क्या थी,हर पद के लिए कितने आवेदन प्राप्त हुए, किस पद के लिए कितने आवेदक थे इसकी सूची । लेकिन डा.टीआर केम ने यूजीसी को आज तक यह सब दस्तावेज नहीं दिया है। उल्टे साम-ताम-दंड-भेद और तिकड़म करते हुए पूरा जोर लगा दिये  हैं कि यूजीसी 9 पदों पर साक्षात्कार कराने की अनुमति तो दे ही दे, उनका कार्यकाल  अगले और 5 साल के लिए बढ़ा दे। चर्चा है कि  केम इसके लिए सीईसी  गवर्निंग बोर्ड के अध्यक्ष जब्बार पटेल से भी पैरवी करा रहे हैं।पूणे के जब्बार पटेल को राकांपा प्रमुख व कृषि मंत्री शरद ने सीईसी गवर्निंग बोर्ड का अध्यक्ष बनवाया है। सो जब्बार पटेल अपने आका पवार के पावर के बदौलत तमाम घोटालों व भ्रष्टाचार आरोपी डा. टीआर केम को 70 साल तक की उम्र तक सीईसी निदेशक बनाये रखने पर आमादा हैं, और इसके लिए तरह तरह के उपक्रम कर रहे हैं। लेकिन इसकी सूचना मिलने पर अरविंद केजरीवाल के साथ परिवर्तन संस्था शुरू करने वाले कैलाश गोदुका ने कई सांसदों को पत्र लिखा। जिस पर लोकसभा सांसद राजेन्द्र सिंह राणा ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के प्रमुख को 09 अगस्त 2012 को पत्र लिख टी.आर.केम की इस करनी और तमाम घोटालों के आरोपों की तुरंत जाँच कराने का आग्रह किया।और दूबारा पत्र लिखकर इस मामले में अब तक हुई कार्रवाई और बैठकों का विवरण मांगा है।  इसके बारे में  राणा ने मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल को भी पत्र लिखकर इस मामले की जांच का आग्रह किया है।
कैलाश गोदुका ने भी दिल्ली उच्चन्यायालय के फैसले की प्रति संलग्न करते हुए 13 अगस्त 2012 को कपिल सिब्बल को पत्र लिखकर जामिया से बर्खास्त दीपक केम की आई.आई.आई.टी. ,इलाहाबाद में डिप्टी रजिस्ट्रार पद की नियुक्ति को निरस्त करवाने की अपील की है।
जानकार बताते हैं कि आई.आई.आई.टी. इलाहाबाद के निदेशक डा. मुरली धर तिवारी ने दीपक केम के बारे में सबकुछ जानते हुए भी उनको डिप्टी रजिस्ट्रार पद पर रखवाया है। तिवारी जी को पता था कि दीपक केम ने विदेशी लेखक की किताब से काफी मात्रा में सामग्री हूबहू कटपेस्ट करके “डेमोक्रेसी एंड मीडिया” नामक किताब बनाई थी, इसमें सी. एडविन बेकर की विश्व प्रसिद्ध किताब मीडिया, मार्केट्स एंड डेमोक्रेसी से ढेरों पेज का मैटर चुराया गया था, और इसी के चलते जामिया वि.वि.के सेंटर फार कल्चर, मीडिया एंड गवर्नेंस के रीडर पद से  डा. दीपक केम बर्खास्त हुए थे यह खबर पंजाब केसरी ,दिल्ली में दिनांक 19 सितम्बर 2012 को  पेज 3 पर छपी है