Saturday, July 2, 2011

चोरगुरू संरक्षक पुलिसिया कुलपति छिनाली विभूति के धतकर्मों को उजागर करने की कोशिश किया उसके यार ने


sattachakra.com, july 02, 2011, 06.01am
... तो प्रोफेसरी पक्की
-रवींद्र त्रिपाठी
क्या आप हिंदी के लेखक हैं और रोजगार की तलाश में हैं? या आप हिंदी के पूर्व पत्रकार हैं और चाहते हैं कि और कुछ नहीं, तो कम से कम पत्रकारिता पढ़ाने का ही कहीं मौका मिल जाए। अगर इन सवालों का जवाब हां है, तो आपके लिए खुशखबरी है। आप वर्धा जाकर वहां के एक विश्वविद्यालय में ‘राइटर इन रेजिडेंस’ या पत्रकारिता के प्रोफेसर बन सकते हैं।
साल-दो साल तक ठीक-ठाक पैसे मिलेंगे और रहने के लिए आवास की व्यवस्था भी होगी। इतना ही नहीं, शाम का भी इंतजाम रहेगा, हालांकि वर्धा की कानूनी शामें रसहीन होती हैं। लेकिन जैसे हरिशंकर परसाई की कहानी ‘इंस्पेक्टर मातादीन चांद पर’ में एक भारतीय पुलिसवाला चांद पर भी पुलिस महकमे को भारतीय विशेषताओं से लैस कर देता है, वैसे ही एक पुलिस वाले ने गांधी और विनोबा की इस कर्मभूमि को अपने तरीके से रसभूमि बना दिया है। यह भारतीय पुलिसकर्मी की एक और खास उपलब्धि है, जिसे इतिहास में दर्ज किया जाना चाहिए।
खैर ये सारी बातें बाद में, फिलहाल इतना समझ लीजिए कि वहां रहते हुए जरूरी नहीं कि आप कुछ लिखें या पढ़ाएं ही। बिना लिखे या पढ़ाए भी आप वहां रह सकते हैं। बस इन परम पदों को पाने के लिए आपके पास एक खास तरह की पात्रता होनी चाहिए, इसके लिए सिर्फ लेखक या पूर्व पत्रकार होना पर्याप्त नहीं। हिंदी के हजारों लेखक या पत्रकार घूम रहे हैं। सबको ये पद थोड़े दिए जा सकते हैं, आपमें ‘कुछ खास’ तो होना ही चाहिए। अगर यह कुछ खास आपके पास नहीं है, तो आप वर्धा में ‘राइटर इन रेजिडेंस’ या प्रोफेसर बनने के योग्य नहीं हैं।
अवकाश प्राप्त और अवसरवादी वामपंथियों को भी वहां प्राथमिकता दी जाती है। अगर आपके पास देश में मार्क्सवादी क्रांति करने का जाली सर्टिफिकेट है, तो आपको जरूर प्राथमिकता दी जाएगी। वास्तविक वामपंथियों या मार्क्सवादियों के लिए वहां के दरवाजे बंद हैं। जाली सर्टिफिकेट वाले मार्क्सवादियों के लिए वहां आरक्षण की खास व्यवस्था है। अगर आपके पास पूर्व नक्सलवादी होने का जाली सर्टिफिकेट है, तो वरीयता भी दी जाएगी। हाल में वहां एक ऐसे व्यक्ति की प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति हुई है, जिसके पास न केवल पूर्व नक्सलवादी होने का जाली सर्टिफिकेट है, बल्कि ‘बस्तर में बिस्तर’ का जायज सर्टिफिकेट भी है।
पूर्व नक्सलवादी का जाली सर्टिफिकेट होने के अलावा इन पदों के लिए एक दूसरी पात्रता भी है। क्या आप कभी लेखन या आचरण के स्तर पर किसी ऐसे अभियान में शामिल रहे हैं, जो महिला-लेखन और लेखिकाओं को संदिग्ध या स्तरहीन मानता है। अगर आपका जवाब हां है, तो भी आपके लिए संभावनाएं ज्यादा हैं। समझ लीजिए कि आपकी सीट पक्की। अगर आपका जवाब न में है, तो समझ लीजिए कि आपके लिए वहां के दरवाजे बंद हैं।
अगर आपका लेखन महिला विरोधी नहीं भी रहा है, तो कम से कम आचरण जरूर वैसा होना चाहिए। क्या कभी आपने ऐसा कुछ किया है, जिसके आधार पर प्रमाणित कर सकें कि महिलाएं आपके लिए सिर्फ भोग्या है, और कुछ नहीं। या आप किसी तरह की चौर्यकला में निपुण हैं, तो भी आपकी प्रोफसरी पक्की।
नोट- अमर उजाला, नई दिल्ली ,शनिवार ,2 जुलाई 2011 के सम्पादकीय, पेज 12 पर नीचे दायीं तरफ यह सामग्री छपी है ।इसको लिखने वाले रवींन्द्र त्रिपाठी, चोर गुरू संरक्षक पुलिसिया कुलपति छिनाली विभूति के यार हैं ।

Thursday, June 9, 2011

महात्मागांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति पद पर डा.नाग की नियुक्ति


तथाकथित चोरगुरू राममोहन पाठक हाथ मलते रह गये
sattachakra.com,09june,2011,11.00am
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ,वाराणसी (MAHATM GANDHI KASHI VIDYA PEETH,VARANASI)के कुलपति (V C)पद पर डा.नाग ( DR.NAG)की नियुक्ति हो गई। लेकिन वह 30 जुलाई 2011के बाद पदभार ग्रहण करेंगे। डा.नाग ,काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ,वाराणसी के भूगोल विभाग के छात्र रहे हैं। अभी कोलकाता में सरकारी नौकरी में हैं।जहां से मुक्ति के लिए पहले आवेदन देना पड़ेगा।
सो उन्होंने राजभवन उ.प्र.में पत्र भेजकर इसकी सूचना दे दी है।
तब तक या तो अवध राम ही कुलपति पद पर बने रहेंगे या विद्यापीठ के वरिष्ठ प्रोफेसर हैदर कार्यकारी कुलपति होंगे।
लखनऊ में चर्चा है कि चोरगुरू संरक्षक कुलपति अवध राम (AWADH RAM)ने 68 वर्ष का होने तक कुलपति पद पर बने रहने के लिए बहुत जुगाड़ लगाया। अपने संरक्षक कांग्रेसी मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा से भी सिफारिश लगाने की कोशिश की ,लेकिन इनके कारनामों ,तथाकथित घोटालों से अवगत हो गये बेनी बाबू ने इस बार तरजीह नहीं दिया।
सूत्रों के अनुसार तथाकथित चोरगुरू राममोहन पाठक (PROF. RAM MOHAN PATHAK)ने भी महात्मागांधी काशी विद्यापीठ,वाराणसी का कुलपति बनने के लिए हर तरह का उपक्रम किया। दिग्विजय सिंह से लगायत .प्र. के राज्यपाल जोशी तक के यहां जुगाड़ लगाये ।लेकिन सफल नहीं हुए। क्योंकि नकल करके पीएचडी थिसिस लिखने,विद्यापीठ के लाइब्रेरी का प्रभारी होने के दौरान पुस्तकों को प्रिंट मूल्य से कई गुना अधिक दाम पर खरीदने ,आवास विकास से पत्रकार कोटे में अपनी पत्नी के नाम से बादशाह बाग कालोनी में एक फ्लैट पहले ही ले लेने और उसमें अब भी रहने के बावजूद , उसके नाम से शहर में कोई मकान जमीन नहीं होने का शपथ पत्र देकर उसी आवास विकास परिषद से पत्रकारपुरम में बड़ा प्लाट लेने आदि घोटालों,तथाकथित फर्जीवाड़ा करके वाराणसी का एक मंदिर और जमीन अपने नाम लिखवा लेने आदि के इनके ( राममोहन पाठक)कारनामों की फाइल पहले ही राज्यपाल के यहां पहुंच गई थी। इसके चलते तथाकथित चोरगुरू राममोहन के नाम पर विचार ही नहीं हुआ।

Saturday, May 21, 2011

जर्मनी,फ्रांस,अमेरिका में हर तीन में से एक विद्यार्थी फीस चुकाने के लिए शरीर बेचते हैं, भारत में भी यही होने वाला है

-कृष्णमोहन सिंह
नईदिल्ली। प्रधानमंत्री मनोमहन सिंह(MANMOHAN SINGH),योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिह (MONTEK SINGH)अहलूवालिया और शिक्षा मंत्री कपिल सिब्बल(KAPIL SIBBAL) की अमेरिका-यूरोप (AMERICA-EUROPE)परस्त मंहगी शिक्षा नीति के चलते अब भारत में भी गरीब छात्रों को फीस चुकाने के लिए अपना शरीर बेचना पड़ेगा
बर्लिन के 3,200 छात्रों के बीच सर्वे में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि हर तीन में से एक छात्र अपना फीस चुकाने के लिए सेक्स वर्क (sex work) करता है ।रांयटर न्यूज एजेंसी के मुताबिक बर्लिन हमबोल्ट यूनिवर्सिटी Berlin's Humboldt University के शोधकर्ताओं में एक इवा ब्लूमेनश्चिन (Eva Blumenschein) ने बताया कि सर्वे रिपोर्ट झटका देने वाला ,चौंकाने वाला है। सर्वे के अनुसार बर्लिन में लगभग 33 प्रतिशत ,फ्रांस में लगभग 29.2 प्रतिशत और किव में लगभग 18.5 प्रतिशत छात्र फीस चुकाने के लिए अपना शरीर बेचते हैं या सेक्स वर्क करते हैं। उनका कहना है कि एजुकेशन रिफार्म के बाद नये कोर्स में वर्क लोड इतना ज्यादे कर दिया गया है कि छात्र कहीं कुछ घंटे नौकरी करके खर्च निकालने की हालत में नहीं हैं। ऐसे में कम समय में अधिक पैसा कमाने का जरिया सेक्स वर्क बन गया है छात्रों को कम समय में इसमें अधिक पैसा मिल जाता है। कालेज या विश्वविद्यालय की मंहगी फीस,हास्टल खर्च चुकाने के लिए छात्र यह कर रहे हैं। जब फीस कम थी और पहले के सिलेबस में वर्क लोड कम था तो छात्र अपना होम वर्क जल्दी पूरा करके कुछ घंटे प्राइवेट नौकरी करके खर्च निकाल लेते थे। छात्र बढ़ी फीस और पढ़े खर्चे को पूरा करने के लिए यदि भारी भरकम लोन मंहगे दर पर लेते हैं और बाद में नौकरी नहीं मिलती है या कोई दुर्घटना आदि हो जाने पर ,लोन की किस्त नहीं चुकानेपर छात्र को बैंकवाले दिवालिया घोषित कराके बीमा कम्पनी से सूद सहित अपना लोन का पैसा ले लेते हैं।एक बैंक छात्र को दिये लोन को किसी और बैंक को मार्टगेज कर देता है,वह आगे किसी और बैंक को मार्टगेज कर देता है। इसी मार्टगेज में ही लोन जितने पर दिया गया होता है उससे काफी मंहगा हो जाता है।छात्र को दिवालिया घोषित कराके बैंक वाले ,बीमा कम्पनियों से अपना ब्याज सहित रकम वसूल लेते हैं। उसके बाद तो छात्र को न तो मकान के लिए ,नही वाहन के लिए बैंक से लोन मिलता है।इन सब हालात से बचने के लिए छात्र बहुत कम लोन लेकर काम चलाने की कोशिश करते हैं। बाकी फीस आदि का खर्च शरीर बेचकर पैसा जुटाते करते हैं।
अब यही हाल भारत में भी होने वाला है। यहां भी अमेरिका व यूरोप के पैटर्न पर मनमोहन ,मोंटेक,कपिल सिब्बल की अमेरिका परस्त तीकड़ी ने शिक्षा को इतना मंहगा कर दिया कि गरीब के बच्चों को पढ़ाई खर्च जुटाना मुश्किल हो गया है।
-यह खबर "पंजाब केसरी",शुक्रवार,20 मई ,2011,दिल्ली के पेज 2 की लीड स्टोरी है।
sattachakra.com

Friday, May 6, 2011

सुब्रत राय, अनिल अंबानी, अमर सिंह ,लाइजनर नीरा राडिया, पत्रकार उपेन्द्र राय,वकील प्रदीप राय के आपसी लाभालाभी लिंक

-sattachakra.com, 06 may 2011,03.15pm
मालूम हो कि नीरा राडिया ने सबसे पहले सुब्रतो राय व उनकी कम्पनी सहारा के लिए ही लाइजनिंग का काम शुरू किया था।तबसे नीरा के लिंक सुब्रतो से जुड़े हुए हैं।कहा जाता है कि नीरा राडिया ने ही सहारा न्यूज नेटवर्क के निदेशक पद पर उपेन्द्र राय की नियुक्ति करवाया।न दो खबर को पढ़कर इनसबके आपसी लाभालाभी लिंक समझ सकते हैं-
1-
SC slaps contempt notice to Sahara Group chief Subrata Roy
Dhananjay Mahapatra, TNN | May 6, 2011, 03.12pm IST
NEW DELHI: The Supreme Court on Friday issued a contempt notice to Sahara Group CEO Subrata Roy and two others for trying to threaten and intimidate an Enforcement Directorate officer who sent a notice to Roy in connection with the 2G scam.
According to the ED, Roy's Sahara Group transferred Rs 150 crore to Swan Telecom allegedly in connection with the 2G scam, which relates to alleged irregularities in the allocation of spectrum to telecom companies.
The apex court had on March 16 warned against any interference from any quarter in the work of CBI and ED officers. The court said the way Sahara Media asked the ED officer, Rajeshwar Singh, personal questions and threatened to do a series of stories after he issued the notice to Roy under the Prevention of Money Laundering Act, it prima facie amounted to contempt of court.
The ED on Friday moved the SC accusing Roy of intimidating its officers investigating the 2G scam and had filed a criminal contempt petition.
ED said Roy did not turn up before it for questioning despite its repeated notices. It also said Roy's newspaper published an item about Rajeshwar Singh pointing fingers at him.

2-
नीरा राडिया वाले टेप में है उपेन्द्र राय,प्रदीप राय की दलाली कुंडली की कुंजी
sattachakra.com,04 may2011,08.00PM
उपेन्द्र राय [पत्रकार(फिलहाल सहारा न्यूज नेटवर्क के डायरेक्टर न्यूज) ]का ब्रदर-इन-ला,जो भी है उसका...कजिन ब्रदर प्रदीप राय यही तो काम करता है -नीरा राडिया
..Upendra Rai (a journalist) ka brother-in-law, jo bhi hai uska...cousin brother—Pradip Rai—yehi to kaam karta hai. -NIRA RADIA
सबूत है outlook पत्रिका का 27 दिसम्बर 2010 वाला अंक-

radiagate-II
‘This Litigant Told Me He Paid Vijender Jain 9 Cr’
Sunil Arora Former Chairman of Air India, June 20, 2009
Here, lobbyist Niira Radia is chatting with Sunil Arora, former chairman of Air India and a serving bureaucrat. They are discussing corruption in the judiciary. Arora is telling her how judgements were fixed in the sealing cases in New Delhi when commercial areas and establishments in residential areas were sealed on the orders of erstwhile Supreme Court Chief Justice Y.K. Sabharwal. Arora informs Radia that a Delhi High Court judge, Justice Vijender Jain, was paid off Rs 9 crore in a sealing case by a middleman. The favourable judgement was written one month before it was delivered; the middleman was even given an advance copy. Justice Jain is referred to as Justice Sabharwal’s man.Sunil Arora: Haan, ab to higher judiciary mein corruption bahut ho gayi na...
Niira Radia: Haan?
SA: Higher judiciary mein corruption bahut ho gayi na...
NR: Bahut zyaada, it’s like crazy situation...
SA: In the sealing cases, one chap had told me that he’ll get this judgement after one month.
NR: Haan.
SA: And he told me how much he had paid to whom.
NR: My god!
SA: I said, yaar, tum mazaak kar rahe ho. He said main aapko bata raha hoon ye judgement hai, and he broadly outlined the judgement...ki, this is to be pronounced after one month. To aap dekh lena, main khud hi copy le aaoonga uski...tab next time jab ho jayegi, woh le aaya copy.... He showed me, that order. He had paid 9 cr...as he claimed, at the residence.
NR: Kaun tha yeh?
SA: I mean this litigant had paid Rs 9 crore to that high court judge in Delhi.
NR: Good god!
SA: This is what he claimed...ki that I paid, at his home.
NR: Kaun sa judgement tha?
SA: Koi tha land deal, real estate ka.
NR: Pathetic ha? Yeh hai na, yeh Upendra Rai (a journalist) ka brother-in-law, jo bhi hai uska...cousin brother—Pradip Rai—yehi to kaam karta hai.
SA: And this gentleman ultimately became chief justice!
NR: My god!
SA: Jisne judgement diya tha...he became CJ (chief justice), abhi retire hua tha, Vijender Jain, naam bhi bataa deta hoon.
NR: Haan, I know.
SA: Jo Sabharwal (CJI Y.K. Sabharwal) ka khaas aadmi tha.
NR: Haan uske upar to problem hua tha na beech mein?
SA: Nahin par woh (Vijender Jain) to ban gaya CJ (of Punjab and Haryana High Court), ab to CJ ban ke retire bhi ho gaya hai. Kya farak pada...

और प्रदीप राय वही हैं जो अपने को अमर सिंह व अमिताभ बच्चन का केस देख रहे वकील का जूनियर वकील कहते रहे हैं।यह आदमी अपने को अमर सिंह और अमिताभ बच्चन का बहुत ही खास होने का दावा करता रहा है।अमर -अमिताभ से आय से अधिक संपत्ति आदि केस के मामले में कागज लाकर वकीलों को देता रहा है। चर्चा है कि इसने नीरा राडिया के कथन वाले करम करके दिल्ली के कनाटप्लेस क्षेत्र में स्थित ललित सूरी के होटल हालीडेइन से सटे बने वर्ल्ड ट्रेड टावर में कई करोड़ रूपये कीमत का अपना एक कार्यालय बना लिया है। अनिल के राय अंकित ( ANIL K RAI ANKIT)द्वारा नकल करके एक दर्जन से अधिक पुस्तकें अपने नाम से छपवाने वाला मामला एक हिन्दी पत्रिका में छपने के बाद इसी प्रदीप राय के कार्यालय में कुलपति विभूति नारायण राय(VIBHUTI NARAIN RAI),दिल्ली में कार्यरत एक राय आपीएस अफसर,एक राय आयकर कमिश्नर आदि ने बैठक की थी।
दलाली महारथियों की कुंडली व करनी के आरोपों की पुष्टि PTI के इस खबर से और पुख्ता हो जाती है-

CBI registers case to probe bribe offer by scribe to ED sleuth

Press Trust Of India
New Delhi . has begun investigation into the alleged bribe offer made by a journalist said to be on behalf of Corporate lobbyist Niira Radia after registering a case following a complaint by Enforcement Directorate. Highly-placed sources in the agency said a Preliminary Enquiry (PE) has been registered and the journalist - Upendra Rai - will be called for questioning soon after the statement of Enforcement Directorate was recorded. The Enforcement Directorate has asked the CBI to probe the incident claiming that Rai, working as director (News) Sahara News Network, had approached one of its officers, probing the 2G scam, with a bribe offer of Rs two crore. The sources said the probe into the PE has begun and it would be completed in three months. When contacted, Rai denied the allegations and said that he would cooperate in the probe. "I hope that a through probe is carried out in the case which includes summoning of the ED official who made allegation against me," he said. He acknowledged that he had known corporate lobbyist Niira Radia but that was on the professional front as he was heading the business department of another news channel. "During the last so many years, I may have spoken or met her for not more than eight to ten times," he said and termed it as a "deep-rooted conspiracy to malign" him. Rai said that he had met the officer in question - Assistant Director Rajeshwar Singh - merely for "five minutes". The allegation is that the journalist had sought an appointment with the official on the pretext of "furnishing some information" in its probe in the 2G scam. The ED is probing alleged violation of Prevention of Money Laundering Act in the spectrum scam. Denying any association with Rai or the bribe offer, a spokesperson for Vaishnavi Corporate Communications Private Limited said "we categorically deny the allegations as mentioned. "We are not aware of any journalist acting on our behalf. It is a matter of record that we have always cooperated with all the investigative agencies and have been available for all personal appearances on intimation. "We welcome proper and thorough investigation by the authorities to unearth the truth. We hope that the truth will emerge and lay to rest all these wild allegations," the spokesperson said.

VIBHUTI NARAIN RAI IPS ( विभूति नारायण राय )का उतरता नकाब आहिस्ता..आहिस्ता..

Sattachakra.com, 04 may 2011, 05.16pm

जामिया मिलिया इस्लामिया (JAMIA MILLIA ISLAMIA) ने चोरी की सामग्री से किताब लिखने वाले शिक्षक दीपक केम को बर्खास्त करने का महत्वपूर्ण फैसला किया हैलेकिन उसी दीपक केम के साथ मिलकर नकलचेपी करम करके अपने नाम से पुस्तक छपवाने वाले अनिल के राय अंकित (ANIL K RAI ANKIT) को उनके सजातीय कुलपति विभूति नारायण राय( VIBHUTI NARAIN RAI IPS) बेशर्मी से बचा बढ़ा रहे हैं।इन दिनों पूरी दुनिया में चोरी की सामग्री से किताबें लिखने व शोध की डिग्री लेने की घटनाएं तेजी के साथ बढ़ी है। दुनिया इससे परेशान है। भारत में भी लाखो ऐसी किताबें है जो नकल करके छपवायी गई हैं। वे देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में चल रही हैं। इसी तरह हजारों की तादाद में नकल या चोरी की सामग्री से शोध पूरा कर डिग्रियां ले ली जाती है और फिर वही डिग्रीधारी विश्वविद्यालयों में नौकरी पा लेता है और अपने विद्यार्थियों के बीच नकल और चोरी की संस्कृति को बढ़ावा देता हैपत्रकारद्वय कृष्णमोहन सिंह व संजय देव ने पिछले दिनों देश के कई ऐसे चोर गुरूओं की पोल समाचार पत्रों और टेलीविजन चैनल के कार्यक्रम के जरिये खोली । इनमें एक दीपक केम (DEEPAK KEM) भी था। अचरज है कि दीपक केम ने अनिल कुमार राय अंकित के साथ मिलकर किताब लिखी थी लेकिन अनिल कुमार राय अंकित के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है। ये महोदय वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय (MGAHU,VARDHA))में जनसंचार विभाग में प्रोफेसर और विभाग प्रमुख हैं। दीपक केम को तो चोरी की सामग्री से एक किताब लिखने और एक किताब में सहयोगी होने का आरोप है, जबकि अनिल कुमार राय अंकित उर्फ अनिल के राय अंकित (ANIL K RAI ANKIT )के खिलाफ दर्जानों ऐसी किताबें लिखने का आरोप सप्रमाण लगा है। उन आरोपों को समाचार पत्रों और टेलीविजन चैनल के चोर गुरू कार्यक्रम में पुष्ट किया गया था। वर्धा स्थित विश्वविद्यालय के कुलपति विभूति नारायण राय (VIBHUTI NARAIN RAI IPS / V N RAI) आई पीएस अधिकारी है। साम्प्रदायिकता के विरोध और वामपंथ पक्षधर होने का लाभालाभी अभिनय करके उन्होने अपना सामाजिक मुखौटा बना रखा है। इसकी आड़ में उनके कामकाज और व्यवहार का मुल्यांकन नहीं किया जाता है। जबकि वे घोर जातिवादी है। विभूति राय को अनिल कुमार राय की नियुक्ति के समय ही ये पता था कि उसने चोरी करके अपने बायोडाटा में दी गई किताबें लिखी है। लेकिन स्वजातीय व क्षेत्र का होने के कारण उन्होने उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की। एक बार तो उन्होने ये घोषणा कर दी थी कि वे एक जांच कमेटी बनाकर इसकी जांच करवाएंगे। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ,वाराणसी में कुलपति पद पर रहते हुए बहुत घोटाला करने के आरोपी एक व्यक्ति,जिसके खिलाफ राज्यपाल के आदेश पर जांच चल रही है,उस व्यक्ति की अध्यक्षता वाली एक सदस्यीय जांच कमेटी भी बनाई। जो अबतक एक कदम भी हिल नहीं सकी। विभूति राय ने सबसे पहले ये कहा था कि अनिल के राय के खिलाफ एक पैरा भी चोरी करने का सबूत पेश किया जाता है तो वे उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे। लेकिन जब उन्हें सबूत उपलब्ध करा दिया गया तो वे भी चोरगुरू अनिल के राय की जुबान बोलते हुए, उसकी हां में हां मिलाते हुए मुंह चुराने लगे हैं। लेकिन बड़े जतन से ओढ़ा गया उनका (V N RAI IPS ) यह नकाब अब आहिस्ता-आहिस्ता उतरने लगा है ,और उसके पीछे बहुत दिनो से ढ़का उनका असली चेहरा आहिस्ता आहिस्ता ही सही ,उजागर होने लगा है

Wednesday, May 4, 2011

नीरा राडिया वाले टेप में है उपेन्द्र राय,प्रदीप राय की दलाली कुंडली की कुंजी



sattachakra.com,04 may2011,08.00PM
उपेन्द्र राय [पत्रकार(फिलहाल सहारा न्यूज नेटवर्क के डायरेक्टर न्यूज) ]का ब्रदर-इन-ला,जो भी है उसका...कजिन ब्रदर प्रदीप राय यही तो काम करता है -नीरा राडिया
..Upendra Rai (a journalist) ka brother-in-law, jo bhi hai uska...cousin brother—Pradip Rai—yehi to kaam karta hai. -NIRA RADIA

सबूत है outlook पत्रिका का 27 दिसम्बर 2010 वाला अंक-

radiagate-II
‘This Litigant Told Me He Paid Vijender Jain 9 Cr’
Sunil Arora Former Chairman of Air India, June 20, 2009
Here, lobbyist Niira Radia is chatting with Sunil Arora, former chairman of Air India and a serving bureaucrat. They are discussing corruption in the judiciary. Arora is telling her how judgements were fixed in the sealing cases in New Delhi when commercial areas and establishments in residential areas were sealed on the orders of erstwhile Supreme Court Chief Justice Y.K. Sabharwal. Arora informs Radia that a Delhi High Court judge, Justice Vijender Jain, was paid off Rs 9 crore in a sealing case by a middleman. The favourable judgement was written one month before it was delivered; the middleman was even given an advance copy. Justice Jain is referred to as Justice Sabharwal’s man.Sunil Arora: Haan, ab to higher judiciary mein corruption bahut ho gayi na...
Niira Radia: Haan?
SA: Higher judiciary mein corruption bahut ho gayi na...
NR: Bahut zyaada, it’s like crazy situation...
SA: In the sealing cases, one chap had told me that he’ll get this judgement after one month.
NR: Haan.
SA: And he told me how much he had paid to whom.
NR: My god!
SA: I said, yaar, tum mazaak kar rahe ho. He said main aapko bata raha hoon ye judgement hai, and he broadly outlined the judgement...ki, this is to be pronounced after one month. To aap dekh lena, main khud hi copy le aaoonga uski...tab next time jab ho jayegi, woh le aaya copy.... He showed me, that order. He had paid 9 cr...as he claimed, at the residence.
NR: Kaun tha yeh?
SA: I mean this litigant had paid Rs 9 crore to that high court judge in Delhi.
NR: Good god!
SA: This is what he claimed...ki that I paid, at his home.
NR: Kaun sa judgement tha?
SA: Koi tha land deal, real estate ka.
NR: Pathetic ha? Yeh hai na, yeh Upendra Rai (a journalist) ka brother-in-law, jo bhi hai uska...cousin brother—Pradip Rai—yehi to kaam karta hai.
SA: And this gentleman ultimately became chief justice!
NR: My god!
SA: Jisne judgement diya tha...he became CJ (chief justice), abhi retire hua tha, Vijender Jain, naam bhi bataa deta hoon.
NR: Haan, I know.
SA: Jo Sabharwal (CJI Y.K. Sabharwal) ka khaas aadmi tha.
NR: Haan uske upar to problem hua tha na beech mein?
SA: Nahin par woh (Vijender Jain) to ban gaya CJ (of Punjab and Haryana High Court), ab to CJ ban ke retire bhi ho gaya hai. Kya farak pada...


और प्रदीप राय वही हैं जो अपने को अमर सिंह व अमिताभ बच्चन का केस देख रहे वकील का जूनियर वकील कहते रहे हैं।यह आदमी अपने को अमर सिंह और अमिताभ बच्चन का बहुत ही खास होने का दावा करता रहा है।अमर -अमिताभ से आय से अधिक संपत्ति आदि केस के मामले में कागज लाकर वकीलों को देता रहा है। चर्चा है कि इसने नीरा राडिया के कथन वाले करम करके दिल्ली के कनाटप्लेस क्षेत्र में स्थित ललित सूरी के होटल हालीडेइन से सटे बने वर्ल्ड ट्रेड टावर में कई करोड़ रूपये कीमत का अपना एक कार्यालय बना लिया है। अनिल के राय अंकित ( ANIL K RAI ANKIT)द्वारा नकल करके एक दर्जन से अधिक पुस्तकें अपने नाम से छपवाने वाला मामला एक हिन्दी पत्रिका में छपने के बाद इसी प्रदीप राय के कार्यालय में कुलपति विभूति नारायण राय(VIBHUTI NARAIN RAI),दिल्ली में कार्यरत एक राय आपीएस अफसर,एक राय आयकर कमिश्नर आदि ने बैठक की थी।
दलाली महारथियों की कुंडली व करनी के आरोपों की पुष्टि PTI के इस खबर से और पुख्ता हो जाती है-

CBI registers case to probe bribe offer by scribe to ED sleuth

Press Trust Of India, New Delhi CBI has begun investigation into the alleged bribe offer made by a journalist said to be on behalf of Corporate lobbyist Niira Radia after registering a case following a complaint by Enforcement Directorate. Highly-placed sources in the agency said a Preliminary Enquiry (PE) has been registered and the journalist - Upendra Rai - will be called for questioning soon after the statement of Enforcement Directorate was recorded. The Enforcement Directorate has asked the CBI to probe the incident claiming that Rai, working as director (News) Sahara News Network, had approached one of its officers, probing the 2G scam, with a bribe offer of Rs two crore. The sources said the probe into the PE has begun and it would be completed in three months. When contacted, Rai denied the allegations and said that he would cooperate in the probe. "I hope that a through probe is carried out in the case which includes summoning of the ED official who made allegation against me," he said. He acknowledged that he had known corporate lobbyist Niira Radia but that was on the professional front as he was heading the business department of another news channel. "During the last so many years, I may have spoken or met her for not more than eight to ten times," he said and termed it as a "deep-rooted conspiracy to malign" him. Rai said that he had met the officer in question - Assistant Director Rajeshwar Singh - merely for "five minutes". The allegation is that the journalist had sought an appointment with the official on the pretext of "furnishing some information" in its probe in the 2G scam. The ED is probing alleged violation of Prevention of Money Laundering Act in the spectrum scam. Denying any association with Rai or the bribe offer, a spokesperson for Vaishnavi Corporate Communications Private Limited said "we categorically deny the allegations as mentioned. "We are not aware of any journalist acting on our behalf. It is a matter of record that we have always cooperated with all the investigative agencies and have been available for all personal appearances on intimation. "We welcome proper and thorough investigation by the authorities to unearth the truth. We hope that the truth will emerge and lay to rest all these wild allegations," the spokesperson said.

चोरगुरू दीपक केम बर्खास्त ( जामिया में रीडर थे)

Sattachakra.com, 2 may 2011, 4.00pm
  • जामिया मिलिया इस्लामिया(JAMIA MILLIA ISLAMIA), दिल्ली के सेंटर फार कल्चर एंड मीडिया गवर्नेस विभाग के रीडर चोरगुरु डा. दीपक केम(DEEPAK KEM) को नकल करके पुस्तकें लिखने के मामले में बर्खास्त कर दिया गया। चोरगुरु दीपक केम और चोरगुरु अनिल के राय अंकित (ANIL K RAI ANKIT)ने मिलकर कटपेस्ट करके जो किताब अपने नाम बनाई है उसका पृष्ठवार चोरी के दस्तावेज सहित खुलासा पत्रकारद्वय कृष्णमोहन सिंह व संजय देव ने अपने खोजपरक कार्यक्रम "चोरगुरू" में किया।

उसकी सीडी, जामिया मिलिया इस्लामिया के कुलपति के यहां भेजकर कार्रवाई करने की मांग की गई। जामिया के कुलपति ने जांच कराई। इसमें दीपक केम द्वारा इंटरनेट से सामग्री कटपेस्ट करके अपने नाम पुस्तकें छपवाने के कारनामे सच पाये गये। उसके बाद चोरगुरु दीपक केम की बर्खास्तगी पर कार्यकारिणी ने मुहर लगा दी। मालूम हो कि दीपक केम के पिता यूजीसी में साढ़े तीन साल पहले तक सेक्रेटरी थे। अभी यूजीसी के ही एक विभाग नाक में कुलपति रैंक के पद पर निदेशक हैं। इस पद पर उनकी नियुक्ति यू.जी.सी. के तबके चेयरमैन थोराट (THORAT)ने की है। कैसे की है, इसकी स्टोरी बाद में। इसी तरह बड़े केम ने अपने पुत्र दीपक और उनकी पत्नी को किस तरह आगे बढाया है, दीपक को प्रोफेसर बनवाने के लिए कहां-कहां जुगाड़ भिड़ा रहे थे, कैसे यू.जी.सी. आदि का प्रोजेक्ट दिलवाया जाता रहा है, इसके बारे में बाद में। पहले दीपक केम के नकल करके कई किताबें लिखने के कारनामों पर।

दीपक केम ने, हात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा(MGAHU,VARDHA) के जनसंचार विभाग में अपने सजातीय पुलिसिया कुलपति विभूति नारायण राय (VIBHUTI NARAIN RAI IPS/ V N RAI) )की कृपा से जुलाई 09 में प्रोफेसर नियुक्त हुए व हेड बने, अनिल कुमार राय उर्फ अनिल के. राय अंकित( ANIL K RAI ANKIT) के साथ मिलकर PHOTOGRAPHY PRINCIPLES AND PRACTICES नामक 2500 रूपये की किताब ,कापीपेस्ट करके अपने नाम छपवाई है इसे श्रीपब्लिशर व डिस्ट्रीब्यूटर, दरियागंज, दिल्ली ने छापा है। इसमें 22 चैप्टर हैं। ये 22 चैप्टर तीन विदेशी पुस्तकों के चैप्टर से चैप्टर तक हूबहू उतार कर बनाये गये हैं। नकलचेपी दीपक केम और अनिल के. राय अंकित की इस पुस्तक में ढेर सारी फोटो भी है। इसके चयन में भी केम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसी दीपक केम के मार्फत इनके पिता यानी बड़े केम से जुगाड़ लगाकर अनिल के. राय अंकित ने यूजीसी (UGC)का एक प्रोजेक्ट लिया है।

इसमें भी एक प्रोजेक्ट फेलो को, नियुक्त करने के एक साल बैक डेट से सेलरी दिलाने का आर्डर कराने का धांधली किया है। इसमें यू.जी.सी. का एक कर्मचारी भी शामिल है। मालूम हो कि जिस तरह चोरगुरू दीपक केम के नकलचेपी कारनामे की सीडी जामिया के कुलपति के यहां भेज कर कार्रवाई करने की मांग की गई थी, उसी तरह चोरगुरू अनिल के राय अंकित के नकलची कारनामे की सीडी महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विवि, वर्धा(MGAHU,VARDHA) के कुलपति विभूति नाराय़ण राय ( VIBHUTI NARAIN RAI IPS / V N RAI ) के यहां भेजकर कार्रवाई की मांग की गई थी। जामिया के कुलपति ने तो चोरगुरू दीपक केम को बर्खास्त कर दिया, लेकिन उसी मामले में हिन्दी विवि के कुलपति विभूति नाराय़ण राय ने अपने सजातीय चोरगुरू अनिल के राय को लगातार बचाने ,बढ़ाने और पदप्रभार देने का काम कर रहे हैं। बताया जाता है कि इसकी वजह यह है कि पुलिस अफसर विभूति नारायण राय जब वामपंथी होने का अभिनय करके वामपंथियों से जोड़-जुगाड़ लगवा कुलपति बने तो इस अपने सजातीय चोर को लाकर प्रोफेसर और हेड बना दिये। सो अब यह पुलिसिया कुलपति अपने चहेते इस चोरगुरू को बचाने-बढ़ाने में जी-जान से जुटा है। लेकिन चोरगुरू अनिल के राय अंकित के पार्टनर दीपक केम की बर्खास्तगी से अनिल के राय अंकित और उसके संरक्षक पुलिसिया कुलपति विभूति नारायण राय की असलियत तो उजागर हो ही गई।

Sunday, May 1, 2011

तथाकथित चोरगुरूद्वय अनिल कुमार उपाध्याय व राममोहन पाठक का यूजीसी व मंत्रालय में जुगाड़ लगाना सफल नहीं हुआ

दिल्ली पहुंचे थे, कई दिन जुगाड लगाने ,सिफारिश कराने में लगाये

-sattachakra.com-गपशप

नकल करके डिलिट थीसिस लिखने वाले और उस डिलिट के आधार पर अपने को पत्रकारिता में एशिया का पहला डिलिट (d.lit.)होने का हुंकार भरने वाले अनिल कुमार उपाध्याय ( anil kumar upadhyay)को प्रोफेसर पद पर प्रोन्नत करने का सारा इंतजाम, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ,वाराणसी (mahatma gandhi kashi vidya peeth,varanasi)के चोरगुरू संरक्षक कुलपति अवध राम (awadh ram))ने कर दिया था। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ,वाराणसी के दो पत्रकारिता विभाग में से एक में रीडर हेड अनिल कुमार उपाध्याय के खिलाफ नकल करके डिलिट थिसिस लिखने के प्रमाण सहित लिखित शिकायत कुलपति अवध राम को कई बार किया जा चुका है। डेढ़ माह पहले भी हुआ था। सवा साल पहले इसी अनिल उपाध्याय के नकल करके डिलिट करने और फिर उसे पुस्तक के रूप में छपवा लेने के कारनामे एक टीवी चैनल के चोरगुरू कार्यक्रम में दो कड़ियों में तिखाया गया था। उस समय इसी अवध राम को प्रमाण दिखा कर बातचीत भी किया गया था। जिसपर अवध राम ने कैमरे के सामने तो बहुत बड़ी बड़ी बात कही थी कि नकलची अध्यापक के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। इसके बावजूद इस दोहरे चरित्रवाले कुलपति अवध राम ने कुछ नहीं किया। केवल दिखाने और फेस सेविंग के लिए एक जांच कमेटी गठित कर दिया। जिसकी रिपोर्ट का कुछ पता नहीं।जबकि इसी अवध राम को सारा प्रमाण दिखाकर , भेजकर कहा गया था कि इसकी जांच करावें और उस जांच को आन कैमरा करावें , जिसमें तथाकथित चोरगुरू अनिल उपाध्याय और जिनके पीएचडी थिसिस से अनिल उपाध्याय ने नकल करके अपने डिलिट की थिसिस लिखी है, ये दोनों रहे. दोनो अपना पक्ष रखें। जिन-जिन ने प्रमाण सहित लिखित शिकायत की है उनको भी बुलाया जाय।जांच बैठक आन कैमरा हो।और रिपोर्ट एक माह के भीतर दे दिया जाय।उस रिपोर्ट की कापी उन सबको दिया जाय जिनने प्रमाण सहित लिखित शिकायत की है। लेकिन तथाकथित चोरगुरू संरक्षक कुलपति अवध राम ने यह नहीं किया।उसने उल्टे किया यह कि अनिल उपाध्याय को रीडर से प्रोफेसर पद पर प्रमोशन देने की खानापूर्ति करने के लिए 9 अप्रैल 2011 को साक्षात्कार रखवा दिया। अवध राम ने तो यह करवाकर नकलची अनिल कुमार उपाध्याय को प्रोफेसर बनाने का सारा इंतजाम कर ही दिया था। वह तो यूजीसी ने नकलचेपी अनिल कुमार उपाध्याय के नकलचेपी कारनामे का सप्रमाण लिखित शिकायत मिलने पर अपने नामिनी(साक्षात्कार बोर्ड का एक एक्सपर्ट यूजीसी का नामिनी होता है) को इस साक्षात्कार में नहीं जाने का आदेश जारी कर दिया और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी से इस नकलचेपी के प्रमाण के बारे में पूछ लिया कि आपके यहां इसकी शिकायत पहले से है,इसबार भी हुई है ,फिर भी यह साक्षात्कार कैसे करा रहे हैं। कहा जाता है कि उ.प्र. के राज्यपाल के यहां से भी कोई पाती आई थी। लेकिन जब यूजीसी का नामित एक्सपर्ट का जाना स्थगित हो गया तो साक्षात्कार खत्म करना कुलपति अवध राम की मजबूरी हो गई। तब जाकर अवध राम ने8 अप्रैल 2011 को अनिल कुमार उपाध्याय को साक्षात्कार रद्द होने की सूचना दिलवाई।उसके बाद अनिल कुमार उपाध्याय व इसी विवि के एक और तथाकथित चोरगुरू राम मोहन पाठक ने लकनऊ से लगायत दिल्ली तक जुगाड़ लगाना शुरू किया।कहा जाता है कि बीते हप्ते दोनो तथाकथित चोरगुरू दिल्ली पहुंचे थे। यूजीसी से लगायत मानव संसाधन विकास मंत्रालय तक का चक्कर लगाये। यहां के अफसरों से लगायत नेताओं तक की गणेश परिक्रमा व कीर्तन किये। उसके बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक अफसर से यूजीसी के अफसरों को फोन करवाये। लेकिन यूजीसी से जबाब मिल गया कि साहब आप जिसकी सिफारिश कर रहे हैं उनके खिलाफ तो अकाट्य प्रमाण सहित लिखित शिकायत है, यदि उसे दबाकर यहां से नामिनी उस( नकलचेपी अनिल कुमार उपाध्याय) का साक्षात्कार कराने के लिए भेजा गया तो यूजीसी फंस जायेगी। इस जबाब के बाद दोनो तथाकथित चोरगुरू वापस वाराणसी लौट गये।चर्चा है कि अब जांच रिपोर्ट मैनेज करने की कोशिश हो रही है। इधर राममोहन पाठक ( rammohan pathak)फिर वापस दिल्ली आकर अपने को कहीं कुलपति बनवाने के लिए दिग्विजय सिंह ,कलराज मिश्र, राजनाथ सिंह से लगायत तमाम नेताओं,अफसरों,माननीयों के यहां चक्कर लगा रहे हैं।