Saturday, September 13, 2014

CORRUPT GURU ,CHOR GURU JI LOGON KO KAREN BENKAB , BACHAVEN BHRASTACHARIYON SE SHIKSHA


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आपके कालेज,महाविद्यालय,विश्वविद्यालय में कई भ्रष्ट्राचारीगुरू,चोरगुरू  होंगे। बहुत से कुलपति और रजिस्ट्रार भी जिस तरह से नियुक्त हो रहे हैं और भ्रष्टाचार,जातिवाद  को बढ़ावा दे रहे हैं, कालेज और विश्वविद्यालय के भवन निर्माण,पुस्तक खरीद ,नियुक्ति में मोटा चढ़ावा ले रहे हैं  उससे शिक्षा के ये मंदिर भ्रष्टाचार के गटर बनते जा रहे हैं। यदि कोई पुलिस वाला या मास्टर या कोई अन्यधंधा करने वाला अपने किसी पंथी नेता से केन्द्रीय शिक्षा मंत्री के यहां सिफारिश लगवाकर , राष्ट्रपति के यहां जुगाड़ लगवाकर या पुष्पम् -पत्रम् चढ़ाकर  कुलपति बन जाता है और उसके बाद अपनी ही जाति के एक चोरगुरू को प्रोफेसर व हेड बनाता है। खुद भी भ्रष्टाचार करता है और उसका सजातीय चोरगुरू भी करता है तो आप खुद सोच सकते हैं कि इससे छात्रों को क्या शिक्षा मिलती होगी। देश की गरीब जनता से फोन बिल में शिक्षा शुल्क  के नाम पर ,अन्य तरह से कर (टैक्स) लगाकर धन   क्या ऐसे चोरों,भ्रष्टाचारियों को कुलपति बनाने ,प्रोफेसर बनाने ,शिक्षण संस्थाओं की स्वायत्तता (आटोनामी ),  लूट की खुली छूट देने के लिए किया जा रहा है ? ऐसे चोर,भ्रष्टाचारी कुलपति,प्रोफेसर,शिक्षक उनके रैकेट में शामिल देश व राज्यों के शिक्षा मंत्रालयों के कुछ तथाकथित  भ्रष्ट  घूसखोर मंत्री,सचिव,संयुक्त सचिव ,ओएसडी,यूजीसी के तमाम घूसखोर अफसर ,राज्यों के कई राज्यपाल, उनके चहेते अफसर पूरा रैकेट बनाकर काम कर रहे हैं। इन भ्रष्टाचारियों के विरूद्ध प्रमाण सहित केस दर्ज कर न्याय मांगने जाइये तो वहां भी  ज्यादेतर निराशा ही हाथ लग रही है।इसकी वजह जाननी हो तो  इनदिनों सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडे काटजू द्वारा कुछ जजों व न्यायपालिका की असलीयत उजागर करने वाले लेख को पढ़ लें। ऐसे में अपने बच्चों, छात्रों के भविष्य़ को देशी विदेशी विद्वानों की पुस्तकों,शोधपत्रों आदि को हूबहू उतारकर  पीएचडी,डीलिट कर ,पुस्तकें अपने नाम से छपवा,शोध पत्र अपने नाम से बनवा कर लेक्चरर,रीडर प्रोफेसर पद पर नियुक्त होने ,प्रमोशन पाने ,कुलपति बनने वाले चाोरगुरूओं,उनको नियुक्त करने ,प्रमोशन देने वाले भ्रष्टाचारी कुपतियों,डीन,हेड व कुलसचिवों से बचाने का एक ही उपाय है । वह है ऐसे सफेदपोशों की असलीयत उजागर किया जाय। इनके विरूद्ध सभी संबंधित विभागों में प्रमाण सहित लिखकर कार्रवाई करने की मांग की जाय। इनके लूट तंत्र व रैकेट को उजागर किया जाय ।
 आपके महाविद्यालय,विश्वविद्यालय,शिक्षा मंत्रालय में ऐसे कोई  हैं तो उनका प्रमाण सहित चिट्ठा  sattachakra@gmail  पर ई-मेल कीजिए।

Friday, September 12, 2014

UGC REVIEW COMMITTEE KE INVITEES ME CHORGURU BHRASTACHARI ,BAITHAK ME NAHI NIKALI CHORON-BHRASTACHARIYON KO BARKHAST KARANE VALI BAKAAR , KAISE HOGA MODI KA SAPANAA SAAKAAR


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यूजीसी रिव्यू कमेटी के आमंत्रितों में ज्यादेतर  चोरगुरू ,भ्रष्टाचारी
5 व 6 अगस्त 14 को हुई बैठक में किसी ने भी शिक्षण संस्थानों से चोरगुरूओं को बर्खास्त करने,भ्रष्टाचारी शिक्षकों को मंत्रालयों ,विश्वविद्यालयों के किसी कमेटी में नहीं रखने का सुझाव नहीं दिया , यानी चोरगुरूओं,भ्रष्टाचारीगुरूओं की चांदी  रहेगी, रैकेट चलता रहेगा
ऐसे में कैसे होगा नरेन्द्र मोदी का उच्च शिक्षा को भ्रष्टाचार मुक्त करने ,गुणवत्ता सुधारने का  सपना साकार ?
-कृष्णमोहन सिंह
नई दिल्ली। सूत्रों के मुताबिक 5 और 6 अगस्त 2014 को यूजीसी रिव्यू कमेटी की हुई बैठक में जो चोरगुरू और भ्रष्टाचार आरोपित मास्टरजी लोग थे उनने देशी विदेशी विद्वानों,प्रोफेसरों आदि की कापी राइट वाली  पुस्तकों ,शोधपत्रों आदि से हूबहू कटपेस्ट करके अपने नाम से किताब छपवा लेने वाले,शोध पत्र बना लेने वाले ,पीएचडी थीसिस लिखने वाले और उसके बदौलत नौकरी ,प्रमोशन पाने,हेड व कुलपति बनने वाले ,उन नकल करके लिखी पुस्तकों को विश्वविद्यालयों , महाविद्यालयों के पुस्तकालयों में बिकवाने वाले लेक्चररों,प्रोफेसरों,कुलपतियों  को बर्खास्त करके शिक्षा में सुधार करने के बारे में एक शब्द नहीं बोले। यह भी नहीं कहा कि जिन कुलपतियों, प्रोफेसरों , अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के प्रमाण सहित गंभीर आरोप हैं उनको राज्य व केन्द्र के शिक्षा मंत्रालय व विश्वविद्यालयों के किसी भी कमेटी में नहीं रखा जाये। क्योंकि इनमें से ज्यादेतर तो ऐसे ही हैं।ऐसे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उच्च शिक्षा विजन को कैसे सफलता मिलेगी ?
 
स्वदेश,इंदौर,दिनांक 11-09-2014, पृष्ठ 5

इसे भी पढ़ें -

Wednesday, September 10, 2014

RELIANCE KA LIAISONING VICE PRESIDENT SANJAY KACHROO BANA SMRITI IRANI KA AGHOSHIT OSD



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रिलायंस के लाइजनिंग वाइस प्रेसिडेंट  संजय कचरू बने स्मृति ईरानी के अघोषित ओएसडी
क्या मुकेश अंबानी ने अपने इस लाइजनर को रखवाया है या स्मृति ने अपनी पसंद से रखा है
बड़ा सवाल यह है कि कचरू 2 लाख रू. से अधिक की वेतन वाली नौकरी छोड़ क्यों 60 हजार रू. की नौकरी पर स्मृति के यहां आया है
क्या यह प्रधानमंत्री को मालूम है
- कृष्णमोहन सिंह
नईदिल्ली। मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी के विशेष कार्यकारी अधिकारी (ओएसडी) के तौर पर ( अघोषित रूप से) रिलायंस के लाइजनिंग वाइस प्रेसिडेंट संजय कचरू काम कर रहे हैं। स्मृति के यहां से सभी फाइल कचरू  को भेजी  जा  रही हैं , वहां से आगे बढ़ाई जा रही हैं। जिसके चलते चर्चा होने लगी है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय में स्मृति ईरानी के बाद सबसे पावरफुल उनके अतिअंतरंग संजय कचरू हैं। और सवाल किया जाने लगा है कि सुंदर चेहरे मोहरे डीलडौल वाले अपने लाइजनर कश्मीरी संजय कचरू को मुकेश अंबानी ने मानव संसाधन मंत्रालय में स्मृति ईरानी के यहां रखवाया है या स्मृति ने अपने पहले के संबंधों के चलते कचरू को अपना अघोषित ओएसडी बना लिया है।इसके बारे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पता है या नहीं इसपर भी सवाल किया जाने लगा है। क्योंकि यदि प्रधानमंत्री के यहां से संजय कचरू का नाम स्मृति ईरानी के ओएसडी पद के लिए मंजूर हो गया होता तो कचरू अपने कमरे के बाहर अपने पद वाला नेम प्लेट लगवा लिया होता। यह भी कहा जा रहा है कि स्मृति जुबिन ईरानी अक्सरहां मुकेश अंबानी के यहां मुंबई आशिर्वाद लेने जाती रही हैं। सो हो सकता है कि मुकेश अंबानी ने अपने लाइजनर कचरू को उनके यहां रखवाया हो । और मुकेश अंबानी ने रखवाया होगा तो नरेन्द्र मोदी उसके नाम की मंजूरी देंगे ही । वैसे तो यदि स्मृति ने खुद ही कचरू को रखा है तो भी मोदी मना नहीं करेंगे, ऐसा मंत्रालय व बाहर के लोगों का कहना है। 
लेकिन कचरू को चाहे मुकेश अंबानी रखवाये हैं या खुद स्मृति ईरानी ने अपनी पसंद के कारण रखा है ,सबसे बड़ा सवाल यह है कि संजय कचरू मुकेश अंबानी की कंपनी में रिलायंस इंडस्ट्रीज में वाइस प्रसिडेंट कारपोरेट(लाइजनिंग) के पद पर जब 2 लाख रूपये से अधिक तनख्वाह पा रहे थे तो उसको छोड़कर 60 हजार रू. महिने के वेतन पर स्मृति ईरानी का ओएसडी क्यों बने ? इसको लेकर तरह तरह की चर्चा शुरू हो गई है।    जहां तक संजय कचरू के काम व अनुभव का सवाल है तो वह बहुत पहले  मुकेश अंबानी वाली रिलायंस इन्फोकाम में लाइजनिंग विभाग में लगभग 4 लाख रू. सालाना तनख्वाह पर थे। वहां से उद्योगपति  रूईया के यहां लाइजनिंग विभाग ( कारपोरेट) में चले गये थे । लगभग 7 माह पहले वापस मुकेश अंबानी की कम्पनी रिलायंस इंडस्ट्रीज में लाइजनर वाइस प्रेसिडेंट के पद पर लगभग 25 लाख रू. से अधिक की सेलरी पर आ गये। लेकिन जब स्मृति जुबिन ईरानी ने मंत्री पद का शपथ ग्रहण किया और मानव संसाधन विकास मंत्री बनीं ,उसके बाद संजय कचरू ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के वाइस प्रेसिडेंट ,कारपोरेट के पद से इस्तीफा दे दिया।इस्तीफा मंजूर हुआ या नहीं ,या वहां से तीन माह के नोटिस पीरियड में ही ईरानी का काम संभाल लिये,वहां से महिने का 2 लाख रू. से अधिक वाला वेतन ले रहे हैं या मानव संसाधन विकास मंत्रालय से ओएसडी पद जो  निदेशक रैंक का है, लगभग 60 हजार रू. महिना वाला वेतन ले रहे हैं, इसके बारे में कोई साफ जवाब नहीं दे रहा है।स्मृति के विश्वासपात्रों में से कुछ का कहना है कि संजय कचरू मंत्री जी के बहुत  घनिष्ट व अंतरंग हैं। कई नेताओं का भी कहना है कि मंत्री ने उनसे जो भी काम हो संजय कचरू से ही बात करने को कही हैं। वह ( कचरू) शास्त्री भवन के मानवसंसाधन विकास मंत्रालय वाले विंग में तीसरे मंजिल पर  मंत्री के कमरे के नजदीक  कमरा नम्बर 314 में बैठते हैं। और मंत्रालय में मंत्री के बाद धमक व हनक उनकी ही है।जिसके चलते लोग कहने लगे हैं कि मंत्रालय तो दो लोग चला रहे हैं ,संजय कचरू और एक्सटेंशन पर चल रहे संयुक्त सचिव उच्च शिक्षा आरपी सिसोदिया।
स्वदेश ,इंदौर ,दिनांक 10-09-2014,पृष्ठ 5
*यह खबर "स्टार समाचार" सतना,भोपाल , "लोकमत" लखनऊ सहित कई राज्यों के कई समाचार पत्रों में भी छपी है।  
*इसे भी पढ़ें - 
Modi ke uchchshiksha vision ko palita lagane ki ta... 

Friday, September 5, 2014

Modi ke uchchshiksha vision ko palita lagane ki taiyari, UGC review committee Invitees me jyadetar CHORGURU,BHRASTACHARI

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मोदी के उच्चशिक्षा विजन को पलीता लगाने की तैयारी
आमंत्रितों में ज्यादेतर चोरगुरू ,भ्रष्टाचारी
-कृष्णमोहन सिंह
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश की शिक्षा उच्चशिक्षा को सुधारने ,उसे अमेरिका और यूरोप के बराबरी में लाने के लिए जो विजन तैयार किये हैं उसे साकार करने के लिए जो समिति बनाई गई है,उसने सुझाव के लिए जिनको आमंत्रित की है उनमें ज्यादेतर  चोरगुरू ,भ्रष्टाचारी,घोटालाआरोपी जातिवादी और रैकेटियर शामिल हैं। यह समिति मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने बनाई है। सूत्रों के मुताबिक इस समिति को बनवाने व इसके सदस्यों के चयन में संयुक्त सचिव उच्च शिक्षा आरपी सिसोदिया ( यूपी कैडर के हैं, डेपुटेशन पर हैं, टर्म खत्म हो गया है ,  एक्सटेंशन पर हैं, यूपीए सरकार ने जाते-जाते एक्सटेंशन दिया ) और मंत्री स्मृति ईरानी के अघोषित ओएसडी संजय कचरू की प्रमुख भूमिका बताई जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक मानव संसाधन विकास मंत्रालय के उच्च शिक्षा सचिव अशोक ठाकुर सेवानिवृत होने वाले हैं ,सारा काम एक्सटेंशन पर चल रहे और स्मृति के विश्वासपात्र हो जाने के कारण फिर एक्सटेंशन पाने की बात कह रहे  संयुक्त सचिव आरपी सिसोदिया देख रहे हैं। सिसोदिया के हस्ताक्षर से ही 30 जुलाई 2014 को  विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की रिव्यू कमेटी बनाने का आदेश निकला है।  बीएचयू का कुलपति रहने के दौरान भ्रष्टाचार व छात्र विरोधी गतिविधियों  के आरोपों के कारण दूसरा टर्म नहीं पाने वाले( तबके राष्ट्रपति केआर नाराय़नन ने इनके नाम वाली फाइल वापस लौटा दी थी, उसके बाद  गौतम ने तबके शिक्षा मंत्री डा. मुरली मनोहर जोशी का पैर पकड़ कर यूजीसी का चेयरमैन बन गये थे, अब जोशी के यहां जाते नहीं हैं )  डा. हरि गौतम की अध्यक्षता में 4 सदस्यीय  समिति बनाई गई है । जिसमें हरि गौतम, प्रो.सीएम जरीवाला ,प्रो. कपिल कपूर और आरपी सिसोदिया हैं। जिसे 6 माह में  रिपोर्ट सौंपनी है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को कैसे ठीक किया जाय,भ्रष्टाचार खत्म किया जाय ,सुधारा जाय ,उन्नत किया जाय , इस पर सुझाव लेने के लिए जिन 13 लोगों को 5 अगस्त 2014 और 13 लोगों को  6 अगस्त 2014 को आमंत्रित किया गया है, उनमें देश विदेश के विद्वानों की कापीराइट वाली शोध पत्रों, पुस्तकों आदि से सामग्री हूबहू उतारकर  मात्र एक साल में ही अपने नाम से 29  पुस्तकें छपवा लेने वाले चोरगुरू प्रो. रमेश चन्द्रा , हैदराबाद में  कुलपति पद पर रहने के दौरान भ्रष्टाचार के आरोपी प्रो. एसई हसनैन, रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर और गुरूघासीदास वि.व. विलासपुर में  कुलपति रहने के दौरान बहुत भ्रष्टाचार व अपनी जातिवालों को भर देने के आरोपी  ( उच्च न्यायलय में मुकदमा  चल रहा है, लोकायुक्त ने इनके खिलाफ टिप्पणी की है)प्रो. लक्ष्मण चतुर्वेदी , भ्रष्टाचार आरोपी प्रो.थोराट के साथ  यूजीसी को भ्रष्टाचार का गढ़ बनाने वाले और डीम्ड विश्वविद्यालयों को मान्यता देने की शुरूआत कराने वाले यूजीसी के पूर्व सचिव आरके चौहान, भ्रष्टाचार आरोपी टीआर केम ,डा.एन.के.जैन, एके डोगरा आदि जैसे लोग हैं।
 
review committee of UGC ,Name sl.no. 1- Dr.Hari Gautam


LIST OF DATE05-09-14 ,SL.NO.7- CORRUPT GURU LAKSHMAN CHATURVEDI,&10- S.E.HASNAIN etc

LIST OFDATE 06-09-14  sl. no. 5 is the name of CHORGURU prof.Ramsesh Chandra,sl.no.7-G.D. Sharma, 8- R.K. Chauhan,9- TR KEM,10-N.K.JAIN,11-DEV SWAROOP,12-A.K.DOGRA,1-LAKSHMAN CHATURVEDI

CHORGURU prof. RAMESH CHANDRA



* स्टार समाचार , सतना , भोपाल में यह खबर 05-09-2014 को पृष्ठ 8 पर छपी है। 
 http://epaper.starsamachar.com/332843/Star-Samachar/05.09.2014-#page/8/1
लोकमत , लखनऊ में 05-09-2014 को छपी है। अन्य कई अखबार में भी छपी है।  

चोरगुरू प्रो. रमेश चन्द्रा के बारे में CNEB NEWS CHANNEL में "चोरगुरू" के कई एपीसोड में दिखाया गया था - इसके बारे में यह पढ़ें-


Sunday, April 4, 2010

पूर्व कुलपति रमेश चन्द्रा बर्खास्त: शैक्षणिक कदाचार व मैटरचोरी के आरोपी
-सत्ताचक्र- sattachakra.blogspot.com
नकल करके एक साल में 29 किताबें लिखने के आरोपी बुंदेलखंड विश्वविद्यालय,झांसी(उ.प्र.) के पूर्व कुलपति प्रो. रमेश चन्द्रा को शैक्षणिक कदाचार व नकलचेपी कारनामो के चलते दिल्ली विश्वविद्यालय के बी.आर.अम्बेडकर सेंटर फार बायोमेडिकल रिसर्च के निदेशक ( Pro. RAMESH CHANDRA , DIRECTOR- B.R.AMBEDKAR CENTRE FOR BIOMEDICAL RESEARCH , DELHI UNIVERSITY ) पद व नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। दिल्ली वि.वि. ने प्रो.रमेश चन्द्रा के शैक्षणिक कदाचार की जांच एक रिटायर जज से कराई ।जिसके बाद रमेश चन्द्रा को बर्खास्त किया गया। इसबारे में जब CNEB न्यूज चैनल की टीम ने दिल्ली वि.वि. के कुलपति , वि.वि. के एक्जक्यूटिव कमेटी के सदस्यों और जज से बात करने की कोशिश की तो सबकेसब कन्नी काट लिये। इस पर आन कैमरा एक भी शब्द बोलने को तैयार नहीं हुए।
मालूम हो कि CNEB न्यूज चैनल ने अपने खोज परक कार्यक्रम चोरगुरूके नौंवे एपीसोड में रविवार 13 -12-09 को रात्रि 8 बजे से साढ़े आठ बजे के स्लाट में, प्रो. रमेश चन्द्रा के नकल करके किताबें लिखने और अपने नाम छपवाने के कारनामों को सप्रमाण दिखाया था। जिसके आधार पर इन शैक्षणिक कदाचारी चोरगुरूओं के खिलाफ जांच के लिए कई सांसदो ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री,केन्द्रीय शिक्षामंत्री और राज्यपाल को पत्र लिखा है। ज्यादेतर कुलपति तो ऐसे शैक्षणिक कदाचारी चोर गुरूओं, नकल करके लिखी उनकी किताबों को छापने वाले पब्लिशर/ सप्लायरों को अन्दर अन्दर बचाने की हर तरह से कोशिश कर रहे हैं। लेकिन इस चक्कर में जब उन कुलपतियों की नौकरी पर तलवार लटकने की नौबत आ रही है तो अपना गला बचाने के लिए जांच कराने का उपक्रम कर रहे हैं। इस जांच में भी खेल हो रहा है । कुछ कुलपति तो अपने चहते शैक्षणिक कदाचारी चोरगुरूओं को बचाने के लिए किसी अपने या कदाचारी के पूर्व परिचित व खास को ही जांच कमेटी का अध्यक्ष बना दे रहे हैं ।और कुछ तो उनसे भी एक हाथ आगे जाकर उस प्रोफेसर को जांच सौंप रहे हैं जिसके खिलाफ ही शैक्षणिक कदाचार का आरोप है । राज्यपाल के आदेश से जिसकी विजिलेंस जांच चल रही है।
रमेश चन्द्रा के बारे में 12 दिसम्बर 2009 को सत्ताचक्रमें जो छपा था उसे यहां दिया जा रहा है-

पूर्वकुलपति रमेश चन्द्रा के नकलचेपी कारनामे और उस पर पूर्व केन्द्रीय शिक्षा मंत्री डा.जोशी की कड़ी टिप्पणी CNEB पर
CNEB
न्यूज चैनल पर दिखाये जा रहे खोजपरक कार्यक्रम चोरगुरूके अगले एपीसोड में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय,झांसी(उ.प्र.) के पूर्व कुलपति प्रो. रमेश चन्द्रा के नकल करके एक साल में 29 किताबें लिखने के काले कारनामों को दिखाया जायेगा। जिस पर पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री डा. मुरली मनोहर जोशी की टिप्पणी भी दिखाई जायेगी। प्रो.रमेश चन्द्रा अभी दिल्ली विश्वविद्यालय के बी.आर.अम्बेडकर सेंटर फार बायोमेडिकल रिसर्च के निदेशक ( Pro. RAMESH CHANDRA , DIRECTOR- B.R.AMBEDKAR CENTRE FOR BIOMEDICAL RESEARCH , DELHI UNIVERSITY ) हैं , और उ.प्र. में किसी वि.वि. में कुलपति बनने के लिए जुगाड़ लगाये हुए हैं। चोर गुरू के इस नौंवे एपीसोड में यह दिखाया जायेगा कि पत्रकारद्वय संजयदेव व कृष्णमोहन सिंह की टीम ने जब कैमरा के सामने प्रो. रमेश चन्द्रा से उनके नकलचेपी कारनामो के बारे पूछा तो किस तरह पहले तो वह बड़े ही टालू अंदाज में कहे यह तो एडिटेड बुक है ।फिर जब उनको दिखाया गया कि इसमें एडिटेड बुक का कोई प्रमाण ही नहीं है। केवल उपर एडिटेड बुक लिख दिया गया है। इस किताब के सभी चैप्टर केवल आपने लिखा है । कौन चैप्टर किससे लिखवाया है ,किस लेखक ने लिखा है,उसका डिटेल क्या ,कहीं कुछ नहीं दिया है। न कोई रिफरेंस नहीं और कुछ। यह किताब कई देशी विदेशी किताबो आदि से पेज के पेज ,चैप्टर के चैप्टर मैटर हूबहू उतार कर बनाई गई है। किस किताब से ,कहां से मैटर हूबहू उतार कर पुस्तक बनाई गई है यह प्रमाण दिखाने पर प्रो. रमेश चन्द्रा ने ठीक वही शब्द कहा जो जामिया मिलिया इस्लामिया,दिल्ली का नकलचेपी रीडर दीपक केम ने कहा था- यह तो मेरी किताब ही नहीं है। चन्द्रा ने कहा कि इसे तो मैंने लिखा ही नहीं है। इस किताब से तो मेरा कोई लेना देना ही नहीं है। जब रमेश चन्द्रा से यह पूछा गया कि जब आप की लिखी किताब नहीं है तो प्रकाशक ने आपके नाम से यह पुस्तक छापा कैसे, इतने दिनो से कैसे बेच रहा है, आपने अब तक उसके खिलाफ केस क्यों नहीं किया ? किया तो ,उसका प्रमाण दे दीजिए ? प्रमाण मांगने पर चन्द्रा ने कहा कहीं होगा। लेकिन प्रो.चन्द्रा ,आपने तो एक साल में 29 तक किताबें लिखी हैं। जो कि कई-कई वालूम में इन्साइक्लोपीडिया के रूप में छपी हैं।उन सभी पुस्तकों के अंतिम कवर पेज के अंदर वाले पेज पर आपका चित्र आपही के बायोडाटा सहित छपा है। इस सवाल पर भी प्रो. चन्द्रा ने झट से कह दिया वे सब भी मेरी लिखी पुस्तकें नहीं है। यह पूछने पर कि आपके नाम से पुस्तकें छपी हैं आप कह रहे हैं आपकी लिखी नहीं है,आपकी नहीं हैं, फिर किसकी हैं ? इस पर चन्द्रा ने बड़े ही चालाकी वाला जबाब दिया- यह तो आप प्रकाशक से पूछिये। उसके बाद पत्रकारद्वय संजयदेव व कृष्णमोहन सिंह की टीम गई प्रो.रमेश चन्द्रा के पुस्तकों के प्रकाशक कल्पाज प्रकाशन, ईशा प्रकाशन से जुड़े गर्ग के यहां दरिया गंज ,नई दिल्ली। उनको जब, रमेश चन्द्रा ने जो कहा था वह बताया गया तो उन्होने कहा- क्या पब्लिशर पागल है जो अपने मन से किसी की किताबें छापेगा या किसी के नाम पर किताबें छाप कर बेचेगा।उसे मरना है क्या? गर्ग ने प्रमाण सहित बताया कि जितनी भी ,जो भी पुस्तकें, वालूम की वालूम इनसाइक्लोपीडिया प्रो. रमेश चन्द्रा के नाम से छपी हैं सबका मैटर वही दिये हैं। उन्होने लिखित दिया है कि ये उनकी मौलिक कृति हैं। गर्ग ने जिसकी छायाप्रति आन कैमरा दिया है। चोरगुरू के इसके पहले के एपीसोड में दिखाया जा चुका है कि बुंदेलखंड वि.वि. के एक प्रो. डी.एस.श्रीवास्तव ने कैमरे के सामने कहा है कि रमेश चन्द्रा मैटर लाकर उनको देते थे, कहते थे कि इसमें से मैटर छांट कर उनके ( प्रो. रमेश चन्द्रा) नाम से किताब बना दो, जो मैटर बचे उससे अपने (डी.एस.श्रीवास्तव )और सरिता कुमारी ( प्रो.रमेश चन्द्रा की चचेरी बहन जो इस समय जामिया मिलिया इस्लामिया,दिल्ली में लेक्चरर हैं) के नाम से पुस्तकें बना लो। इस तरह नकल करके पुस्तकें लिखने ,लिखवाने,छपवाने, उन्हे बिकवाने,एक दूसरे को मदद पहुंचाने, नौकरी संरक्षण देने-दिलानेवाले कुलपतियों, मैटरचोर मौसेरे प्रोफेसर,रीडर,लेक्चरर भाइयों का विश्वविद्यालयों में बड़ा रैकेट बन गया है। जिसका भंडापोड़ CNEB न्यूज चैनेल पर चोरगुरूकार्यक्रम में हो रहा है। यह कार्यक्रम रविवार 13 -12-09 को रात्रि 8 बजे से साढ़े आठ बजे के स्लाट में दिखाया जायेगा।