Monday, June 24, 2013

NAKAL KARAKE D.LIT KARANE VALE ANIL UPADHYAY KO KASHI VIDYAPEETH ME PROF BANANE KI TAIYARI



sattachakra.blogspot.in , 24-06-2013 , 4.45 a.m.


यह खबर " लोकमत "  , लखनऊ में 23 जून 2013 को पहले पन्ने पर छपी है।

नकल करके डीलिट करने वाले अनिल उपाध्याय को काशी विद्यापीठ में प्रोफेसर बनाने की तैयारी
राजभवन , यूजीसी व कुलपति,रजिस्ट्रार के सहयोग से  भ्रष्टाचारी को बर्खास्त नहीं करके की जा रही है पदोन्नति  
GOVERNOR  B.L. J0SHI
सांसद हर्षवर्धन, सांसद राजेन्द्र राणा, कैलाश गोदुका आदि के लगातार प्रमाण सहित शिकायत करने के बावजूद यह किया जा रहा है
-कृष्णमोहन सिंह
VC DR. PRITHVISH NAG
.
REGISTRAR SAHAB LAL MAURYA

CORRUPTGURU DR. ANIL KUMAR UPADHYAY
नईदिल्ली। नकल करके डीलिट थीसिस लिखने और पुस्तक के रूप में छपवाने वाले महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ,वाराणसी के पत्रकारिता विभाग के डा.अनिल कुमार उपाध्याय को रीडर से प्रोफेसर बनाया जा रहा है। उ.प्र. के राज्यपाल,यूजीसी के अध्यक्ष, काशी विद्यापीठ के कुलपति से लगायत राष्ट्रपति , प्रधानमंत्री,मानव संसाधन विकास मंत्री को अन्य चोरगुरू प्रोफेसरों, रीडरों,लेक्चररो के अलावा अनिल उपाध्याय के शैक्षणिक कदाचरण,  दुराचरण ,नकलचेपी कारनामे की प्रमाण सहित शिकायत सांसद हर्ष वर्धन,सांसद राजेन्द्रसिंह राणा, कैलाश गोदुका, ओमप्रकाश सिंह जिनकी पीएचडी थीसीस से नकल किया है , व अन्य लोग 2010 से करते आ रहे हैं। एक टीवी चैनल पर भी  चोरगुरू शीर्षक से  इन शैक्षणिक कदाचारियों के भ्रष्टाचार व नकलचेपी कारनामों के बारे में सप्रमाण दिखाया गया था।इसके बावजूद ऐसे कदाचारी शिक्षकों को बर्खास्त करने के बजाय  बचाने और प्रोमोशन देने का उपक्रम किया जा रहा है।
सांसद हर्षवर्धन ने इस बारे में उ.प्र. के राज्यपाल को 27 फरवरी 2010 को  पत्र लिखा था – ...हमारे उच्च शिक्षा के मंदिरों में इस तरह की अनैतिक और आपराधिक  गतिविधियों को जानकर मैं आपको यह पत्र लिखने को विवश हुआ हूं। उससे भी अधिक दुख की बात यह है कि इन विश्वविद्यालय के प्रशासन द्वारा इस प्रवृति को रोकने की सशक्त कोशिश के बजाय दोषियों को बचाने की ही कोशिश होती दिखाई दे रही है।....
हर्षवर्धन ने 8 नवम्बर 2012 को उ.प्र. के राज्यपाल से सुबह 11 बजकर 20 मिनट पर मुलाकात करके उ.प्र. के कई विश्वविद्यालयों के  चोरगुरूओं के कदाचरण,शैक्षणिक कदाचार का प्रमाण देकर उनको बर्खास्त करने का आग्रह वाला  जो पत्र दिया था उसमें डा.अनिल कुमार उपाध्याय के शैक्षणिक कदाचार,नकलचेपी कारनामे का भी प्रमाण था। जिसमें लिखा था – ...आपसे ( राज्यपाल) आग्रह है कि जिन प्राध्यापकों पर शैक्षणिक कदाचार ,नकल करके पुस्तकें लिखने,पीएचडी शोध प्रबंध लिखने आदि का प्रमाण सहित आरोप लगा है  , उनके विरूद्ध एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित कर उनकी पुस्तकें प्रकाशित एवं वितरित करने वालों और प्राध्यापकों  के नकलचेपी कारनामे,शैक्षणिक कदाचार उजागर करनेवालों को भी बुलाया जाय। जांच की समयावधि सुनिश्चित करके ऐसे शैक्षणिक कदाचार करने वाले प्राध्यापकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। ज्ञातब्य हो कि एक ऐसे ही मामले में प्रमाण सहित शिकायत के बाद जामिया मिलिया इस्लामिया , दिल्ली के  रीडर डा. दीपक केम को जामिया प्रशासन ने 13 जून 2011 को बर्खास्त कर दिया । दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी इस बर्खास्तगी को 10 अप्रैल 2012 को अपने फैसले में जायज ठहराया है
हमें खेद है कि काशी विद्यापीठ और पूर्वांचल वि.वि. में जांच के नाम पर लीपापोती की जा रही है। तर्क दिया जा रहा है  कि जिसके पुस्तक से सामग्री चुराया गया है वह शिकायत करे , केस, करे, न्यायालय निर्णय करेगा। यानी चोरी करके पीएचडी शोध व पुस्तकें लिखने वालों , शैक्षणिक कदाचारियों को वि.वि. प्रशासन लेक्चरर,रीडर,प्रोफेसर बनाता रहे, पदोन्नति करता रहेगा लेकिन ऐसे चोरगुरूओं व शैक्षणिक कदाचारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेगा। इस कृत्य से विद्यार्थियों व शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र में गलत संदेश जा रहा है और अनैतिक व भ्रष्ट प्राध्यापकों को बढ़ावा मिल रहा है।...
इसके बाद राज्यपाल ने 30 नवम्बर 2011 को उनसभी  विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र भेजवाया था जिसमें  शैक्षणिक कदाचारियों  के विरूद्ध जांच कराने के लिए लिखा था।  उस पत्र का संदर्भ देते हुए सांसद हर्षवर्धन ने कुलपति , महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ  को 15 दिसम्बर 2012 को 2 पेज का पत्र लिखा था यह कि-

.... महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ , वाराणसी के पत्रकारिता विभाग में रीडर डा. अनिल कुमार उपाध्याय द्वारा अपनी डीलिट थीसिस (इसी विश्वविद्यालय के एक अन्य पत्रकारिता विभाग, महामना मदन मोहन मालवीय पत्रकारिता संस्थान के निदेशक) में  ओमप्रकाश सिंह की पीएचडी की थीसिस, संचार माध्यमों का प्रभाव  से काफी सामग्री हूबहू उतारकर पहले डी.लिट थीसिस लिखी और बाद में उसे पत्रकारिता एवं विकास संचार पुस्तक के रूप में प्रकाशित करवाया है।
 संबंधित कृत्य से शिक्षा जगत दूषित हो रहा है। यह वास्तव में बौद्धिक समाज के बुद्धि चोर हैं। आपसे आग्रह है कि अपने स्तर से इस मामले में प्रभावी कार्रवाई करें।
 इसी तरह का पत्र सांसद राजेन्द्रसिंह राणा ने  भी लगातार लिखा है। लेकिन काशी विद्यापीठ के कुलपति पृथ्वीश नाग ने एक शैक्षणिक कदाचारी, दुराचरणी प्रो. राममोहन पाठक के विरूद्ध कोई कार्रवाई नहीं करके उसको सेवानिवृत्त हो जाने दिया। और दूसरे चोरगुरू शैक्षणिक कदाचारी , दुराचरणी डा. अनिल कुमार उपाध्याय को  प्रोफेसर बनाने के लिए साक्षात्कार की खानापूर्ति करा रहे हैं। 24 जून 2013 को एक्जक्यूटिव कमेटी की बैठक कराकर 25 या 26 तक उपाध्याय को प्रोफेसर पद का पत्र दे देंगे। अनिल उपाध्याय को प्रोफेसर बनाये जाने की प्रक्रिया रोकने के लिए दिल्ली के वकील राजीव रंजन और अरविंद केजरीवाल के साथ परिवर्तन नामक संस्था  शुरू करने वाले कैलाश गोदुका ने 20 जून 2013 को राज्यपाल उ.प्र.,कुलपति व कुलसचिव महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ  और अध्यक्ष यूजीसी को शिकायती पत्र ई-मेल किया , उनके कार्यालयों में जमा कराया । इसके बावजूद इनसबके मिलिभगत से चोरगुरू व शैक्षणिक कदाचारी अनिल उपाध्याय को प्रोफेसर बनाया जा रहा है।इससे साबित होता है कि शैक्षणिक भ्रष्टाचारियों व भ्रष्टाचार को प्रश्रय देने में इन सबका सहयोग है। और राज्यपाल,यूजीसी चेयर मैन, इनके मातहत अफसरान ,केन्द्र व राज्य के शिक्षा विभाग के आला अफसर व हुक्मरान जानबूझकर  ऐसा करने दे रहे हैं।   

Sunday, June 23, 2013

chorguru anil upadhyay ne o.p. singh ki kitab se katpest karake kaise likhi hai d.lit thesis/ kitab

sattachakra.blogspot.com
23-06-2013, 10.15 , a.m.

corrupt guru dr. anil upadhyay
 corrupt guru's protector vc dr. prithvish NAG
-के.एम.एस
नईदिल्मली।हात्मा गांधी काशी विद्यापीठ,वाराणसी  के पत्रकारिता विभाग  के रीडर , हेड , चोरगुरू ,शैक्षणिक कदाचारी  डा. अनिल कुमार उपाध्याय ने इसी विश्वविद्यालय के महामना मदन मोहन मालवीय पत्रकारिता संस्थान के प्रोफेसर ओम प्रकाश सिंह की पीएचडी थीसिस से पेज के पेज, काफी  सामग्री हूबहू कटपेस्ट करके अपनी डीलिट की थीसिस लिखी। और एशिया में पत्रकारिता में पहला डीलिट होने का दावा करने लगे । लेकिन कत्तई यह दावा नहीं किया कि इस डीलिट की थीसिस की ज्यादेतर सामग्री किसी और के पीएचडी थीसिस से हूबहू नकल करके उतार दिया है। कटपेस्ट करकेडीलिट थीसिस बनाया है।और इसकी पुस्तक  भी छपवा लिया है।नकल करके , कटपेस्ट करके बनाई गई इस पुस्तक का नाम है  "पत्रकारिता एवं विकास संचार "। प्रो. ओम प्रकाश सिंह ने भी अपनी पीएचडी थीसिस को पुस्तक के रूप में छपवाई है जिसका नाम है "संचार माध्यमों का प्रभाव "। यहां पहले यह प्रमाण  दिया  जा रहा कि ओमप्रकाश सिंह की पुस्तक "संचार माध्यमों का प्रभाव" के किस पेज से  किस पेज तक की सामग्री डा. अनिल उपाध्याय की पुस्तक "पत्रकारिता एवं विकास संचार" के किस पेज से किस पेज तक है। इसके बाद एक तरफ ओमप्रकाश की पुस्तक का पेज , दूसरी तरफ डा. अनिल उपाध्याय की पुस्तक का वही कटपेस्ट का प्रमाण वाला पेज दिया जायेगा। उसके बाद ओमप्रकाश की पीएचडी थीसिस का पेज और उसको कटपेस्ट करके अनिल उपाध्याय ने अपनी डीलिट का जो पेज बनाया है उसे आमने -सामने दिया  जायेगा। ताकि डा. अनिल कुमार उपाध्याय के नकलचेपी,शैक्षणिक कदाचार का प्रमाण विश्वविद्यालयों के छात्रों, कर्मचारियों , अध्यापकों,आम जनता व धृतराष्ट्र बनकर इस शैक्षणिक कदाचारी को बचा रहे ,प्रोमोशन दे रहे कुलपति पृथ्वीश नाग, कुलसचिव साहब  लाल मोर्या , राजभवन उ.प्र. के आला अफसर व उनके आका , यूजीसी के आला अफसर व उनके आका बार -बार देख सकें  और यह सब भ्रष्टाचारी गुरू अनिल उपाध्याय की डीलिट डिग्री रद्द करने , उनके विरूद्ध कड़ी कार्रवाई का कुछ आधार बन सके।  
       तो पहले देखें ओमप्रकाश की पुस्तक के पेज और चोरगुरू अनिल उपाध्याय की पुस्तक के पेज का चार्ट (3 पेज )जो साबित करता है कि चोरगुरू ,शैक्षणिक कदाचारी   डा. अनिल कुमार उपाध्याय ने कटपेस्ट करकेकिताब बनाया है। अनिल उपाध्याय की पुस्तक  का पहला संस्करण 2001 में, दूसरा संस्करण 2007 में छपा है। दोनों में डा. अनिल  कुमार उपाध्याय द्वारा किये गये नकलचेपी कारनामे का प्रमाण चार्ट में है।

Thursday, June 20, 2013

CHORGURU UNIL UPADHYAY ko reader se professor banva rahe hain brastachari sanrakshak kulpati NAG, KARA RAHE SAKSHATKAR

SATTACHAKRA.BLOGSPOT.COM
DATE 20-0602013 ,TIME  9.57 A.M.
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ,वाराणसी के जिस चोर गुरू डा.अनिल उपाध्याय,रीडर पत्रकारिता विभाग , को तबके भ्रष्टाचारी गुरू  संरक्षक कुलपति अवध राम ने 9 अप्रैल 2011 को साक्षात्कार कराकर प्रोफेसर बनाने की कोशिश की थी, लेकिन कैलाश गोदुका के शिकायत पर यूजीसी ने उनका साक्षात्कार रद्द करवाया था । और काशी विद्यापीठ के ही प्रो. ओमप्रकाश की पुस्तक से हूबहू सामग्री कट-पेस्ट करके डीलिट की थिसिस लिखने और किताब छपवाने वाले डा.अनिल उपाध्याय     को प्रोफेसर बनाये जाने से रोक दिया था, उसी चोरगुरू अनिल उपाध्याय  को अब  कुलपति पृथ्वीश नाग प्रोफेसर बनवा रहे हैं। इसके लिए 20 जून 2013 को अनिल उपाध्याय के साक्षात्कार की खानापूर्ति की जा रही है।
 मालूम हो कि उ.प्र. के राज्यपाल को सांसद हर्षवर्धन ने अक्टूबर 2012 में   . डा.अनिल उपाध्याय द्वारा नकल करके डीलिट की थिसिस लिखने,नकल करके किताब लिखने का प्रमाण  संलग्न करके इस चोरगुरू , शैक्षणिक कदाचारी,दुराचरणी शिक्षक के विरूद्ध  कार्रवाई करने ,उनको बर्खास्त करने की मांग की थी। जिसपर राज्यपाल ने महात्मागांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति को पत्र लिख कर मामले की जांच कराकर कार्रवाई करने को लिखा था। लेकिन कुलपति नाग लीपा-पोती करके  भ्रष्टाचार आरोपी अनिल उपाध्याय को बचाते रहे और अब उनको प्रोफेसर बनाने जा रहे हैं। जिसके लिए साक्षात्कार की खानापूर्ति की जा रही है।

कैलाश गोदुका ने नकलचेपी , कदाचारी गुरू डा. अनिल उपाध्याय को रीडर से प्रोफेसर बनाये जाने से रोकने के लिए 6 अप्रैल 2011 को जो पत्र  राज्यपाल उ.प्र.और यूजीसी के अध्यक्ष को लिखा था और उस पर कैसे कार्रवाई हुई इसका प्रमाण 7 अप्रैल 2011 को सत्ताचक्र में लगी सामग्री ,यह है-

Thursday, April 7, 2011

चोरगुरू अनिल उपाध्याय को प्रोफेसर बनाने की तैयारी किया चोरगुरू संरक्षक कुलपति अवध राम


यही हैं गुरू अनिल कुमार उपाध्याय
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के कुलपति प्रो.अवध राम को पत्रकारिता विभाग के रीडर हेड , डा. अनिल कुमार उपाध्याय के खिलाफ , प्रोफेसर ओमप्रकाश सिंह की पुस्तक से नकल करके डी.लिट.की थिसिस लिखने और बाद में उसे पुस्तक के रूप में छपवाने की प्रमाण सहित लिखित शिकायत दी गई है। लेकिन इस चोरगुरू संरक्षक कुलपति ने उसकी तय समय में ठीक से जांच कराने के बजाये, चोरगुरू डा. अनिल कुमार उपाध्याय को 09अप्रैल 2011 को प्रोफेसर बनाने की तैयारी कर लिया है। अवध राम का कुलपति पद पर कार्यकाल 14 जुलाई 2011 को पूरा हो रहा है। उसके पहले यह चोरगुरू संरक्षक कुलपति अपने चहेते चोरगुरू डा.अनिल उपाध्याय को उसी तरह बचाता रहा है जैसे म.गां.अं.हि.वि.वि.वर्धा का छिनाली फेम पुलिसिया कुलपति विभूति नारायण राय अपने सजातीय चोरगुरू अनिल कुमार राय अंकित उर्फ अनिल के.राय अंकित को,वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल वि.वि.,जौनपुर के चोरगुरू संरक्षक पूर्वकुलपति आर.सी.सारस्वत (सारस्वत 22 नवम्बर 10 को सेवानिवृत हुए ) वि.वि. के अपने चार चहेते चोरगुरूओं को,उनकी लिखी किताबों को छापने व सप्लाई करने वाले को, अवधेश प्रताप वि.वि. रीवा के चोरगुरू संरक्षक कुलपति यादव अपने चहेते एक एक प्रोफेसर चोरगुरू को बचाते रहे हैं।

चोरगुरू संरक्षक कुलपति अवध राम की चोरगुरू अनिल कुमार उपाध्याय को प्रोफेसर बनाने की तैयारी की खबर जनसत्ता अखबार के लखनऊ संस्करण में 7 अप्रैल 2011 को छपी है -

नकल करने वाले को प्रोफेसर बनाने की तैयारी!
काशी विद्यापीठ में राज्यपाल और मुख्यमंत्री से दखल देने की अपील
-आशुतोष सिंह
लखनऊ, 6 अप्रैल। एक विश्वविद्यालय और पत्रकारिता के दो संस्थान। एक संस्थान का अध्यक्ष दूसरे संस्थान के अध्यक्ष की किताब की नकल करके नई किताब लिख देता है। मामला उजागर होने के बाद नकल करने वाले को कोई सजा देने के बजाए उसे तरक्की देने की कवायद शुरु हो चुकी है। आज इस मुददे को लेकर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बीएल जोशी और मुख्यमंत्री मायावती से दखल देने की मांग की गई। यह मामला है वाराणसी के काशी विद्यापीठ का। जिसमें महामना मदन मोहन मालवीय संस्थान के निदेशक प्रोफेसर ओमप्रकाश सिंह ने काशी विद्यापीठ के पत्रकारिता विभाग के रीडर अनिल कुमार उपाध्याय पर अपनी पुस्तक संचार माध्यमों का प्रभाव की सामग्री को चोरी कर अपनी पुस्तक प्रकाशित करने का आरोप लगाया था। इस मामले की जांच पड़ताल लंबित है। इस बीच आरोपी शिक्षक अनिल कुमार उपाध्याय को रीडर से प्रोफेसर बनाने की प्रक्रिया शुरु हो चुकी है।
दूसरे की पुस्तक की सामग्री को लेकर अपने नाम से प्रकाशित कराने के आरोपों से घिरे काशी विद्यापीठ के रीडर अनिल कुमार उपाध्याय की तरक्की रोकने के लिए आज उत्तर प्रदेश के राज्यपाल और मुख्यमंत्री मायावती से अपील की गई। यह अपील संपूर्ण परिवर्तन जनसंगठन के मुखिया कैलाश गोदुका ने की। गोदुका कई वर्षो से आमजन से जुड़े लोगों का सवाल उठाते रहे हैं और एक दौर में आरटीआई विशेषज्ञ अरविंद केजरीवाल उनके साथ काम कर चुके है। गोदुके ने आज जो ज्ञापन भेजा है उसमें कहा गया है कि डाक्टर अनिल कुमार उपाध्याय का प्रमोशन रोका जाए क्योंकि उन्होने दूसरे की पुस्तक से सामग्री चोरी कर अपनी पुस्तक प्रकाशित की है।
गोदुका ने अपने ज्ञापन में आगे कहा कि प्रोफेसर ओमप्रकाश सिंह, महामना मदन मोहन मालवीय पत्रकारिता संस्थान में प्रोफेसर, निदेशक के पद पर कार्यरत है। प्रोफेसर सिंह की पुस्तक ‘‘संचार माध्यमों का प्रभाव’’ का प्रकाशन, नई दिल्ली से वर्ष 1993 में हुआ है जिसका कापीराइट प्रोफेसर ओमप्रकाश सिंह के पास है। जबकि महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पत्रकारिता विभाग में रीडर पद पर कार्यरत डाक्टर अनिल कुमार उपाध्याय वाराणसी की पुस्तक ‘‘पत्रकारिता एवं विकास संचार’’ प्रथम संस्करण वर्ष 2000-2001, में प्रकाशित हुआ।
प्रोफेसर ओमप्रकाश सिंह का आरोप है कि डाक्टर अनिल कुमार उपाध्याय ने प्रोफेसर ओमप्रकाश सिंह की पुस्तक संचार माध्यमों का प्रभावमें प्रकाशित सामग्री को चोरी करके अपनी पुस्तक पत्रकारिता एवं विकास संचारमें हूबहू प्रकाशित कर लिया।
संचार माध्यमों का प्रभावके सबसे महत्वपूर्ण भाग अध्याय 2 के पृष्ठ 70 से 74 व पृष्ठ 97 से 100 पर छपी सामग्री और पृष्ठ 73, 78 एवं 100 पर मुद्रित चार माडल जो प्रोफेसर सिंह ने विकसित किए थे धोखे से ज्यों का त्यों चुराकर अपनी पुस्तक पत्रकारिता एवं विकास संचारके प्रथम संस्करण के क्रमशः पृष्ठ संख्या 66 से 69 व पृष्ठ संख्या 103 से 105 तक प्रकाशित कराया है।
गोदुका ने अपने ज्ञापन में कहा है कि डाक्टर अनिल कुमार उपाध्याय ने अपनी डीलिट में भी चोरी कर संदर्भ लिखे है क्योंकि डाक्टर अनिल कुमार उपाध्याय की पुस्तक ‘‘पत्रकारिता एवं विकास संचार’’ डी.लिट की ही थ्रीसिस का प्रकाशन है। यह मामला पहले भी कई बार राज्यपाल एवं कुलाधिपति, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के सामने पेश किया जा चुका है और इस पर जांच लंबित है।
ज्ञापन में राज्यपाल से अनुरोध किया गया है कि चोरी कर पुस्तक लिखने वाले डाक्टर अनिल कुमार उपाध्याय को इस प्रकरण के निस्तारण तक कोई प्रमोशन न दिया जाए।गोदुका ने इस मामले में जनसत्ता से कहा- सवाल यह है कि जब एक शिक्षक खुद दूसरे शिक्षक की पुस्तक की सामग्री चुरागाएगा तो वह अपने छात्रों को क्या शिक्षा देगा।
    

Wednesday, June 19, 2013

these very poor families toppers are not corrupt guru's / corrupt officers,leaders childrens


They beat the odds to excel in academics
The Hindu,19-06-2013
Mohamed Imranullah S.
A. Mohamed Navas, one of the toppers in Tamil Nadu Engineering Admissions- 2013, working at a workshop manufacturing springs for bicycle stands in Madurai. Photo: R. Ashok, The Hindu


A boy tops engineering admissions, while a girl is all set to pursue medicine
Muslims in the country are more often than not associated with illiteracy and backwardness besides being projected as proponents of gender inequality. These attributes are slowly but steadily getting watered down as many children from the community are beating the odds to excel in academics.
A case in point is that of A. Mohamed Navas, a 17-year-old resident of Tamil Nadu Slum Clearance Board quarters at Avaniapuram here. Employed in a workshop that manufactures springs meant for bicycle stands for a daily wage of Rs.150 ever since he completed Class XII, the boy has topped the Tamil Nadu Engineering Admissions (TNEA) this year.
With a cut-off mark of 194.50 out of 200, he has been declared State first rank holder among Backward Class-Muslim category students in the vocational stream. Having studied in a Tamil medium government-aided school all through, he is now all set to join B.E., or B.Tech. degree course in a government engineering college.
Nevertheless, the irony remains that the boy, who lost his father at the age of one, does not have anyone to offer him even the paltry expenses he might have to incur at a government college.
His mother A.Thara Hussain Beevi has been pedalling her sewing machine for the last 16 years to feed him and his elder sister A. Zeenath Nishan, now a B.Com graduate.
Navas opened a bank account in his name in June last year for receipt of State Government’s one-time scholarship of Rs.2,000 given to Plus Two students from minority community.
But the account remains dormant till date with the initial deposit of Rs.100 as the scholarship amount is yet to be deposited.
Ms. Beevi was offering Namaaz (prayers) at her single room accommodation when The Hindu knocked at her door for an interview with Navas whom she summoned, over a borrowed mobile phone, from the workshop.
She had no idea that Navaz’s name and photograph had been displayed on Anna University’s website until a requisition was made for the interview. The only thing that had been bothering her ever since he scored high marks in Plus Two was the expenses that she might have to incur on his higher education.
Burkha-clad girl
Not very different is the case of S. Syed Ali Fathima, a 17-year-old Burkha-clad Muslim girl of Othakadai here.
With a cut-off mark of 197 out of 200, she stands a fair chance of getting a medical seat under government quota through 3.5 per cent reservations provided for Backward Class-Muslims.
However, the girl is in no mood to celebrate as her good score has only increased the anxiety regarding future expenses for her studies.
Daughter of a cattle feed seller, the girl has excelled after faced many a humiliation for not paying her school fees in time, her inability to spend for transportation and so on.
Her elder sister too scored 1,033 out of 1,200 marks in the Plus Two examinations a few years ago.
But could not join an engineering course for want of money and ended up pursuing a bachelor’s degree in mathematics.
The two girls studied with the financial assistance from their maternal uncle M.Jahir Hussain, himself a father of three girls, who struggles to make ends meet with the paltry income from his textile business.
Ms.Fathima’s mother S.Mahabu Beevi (51), a school dropout, says: “My father, a tea shop owner at Thumbaipatti in Melur, did not educate me. But I do not want that to happen to my daughters. The education my children receive at schools and colleges is for worldly life and the religious education that I impart to them at home is for life after death. I am confident Allah will show us the way forward.”

Sunday, June 16, 2013

super 30 vale anand mahan hain ya chorkutguruve,bhrastachariguruve mahan hain ?

sattachakra.blogspot.com

क्या पटना में गरीब बच्चों के लिए सुपर 30 नामक कोचिंग  शुरू करनेऔर इसमें पढ़ाकर अब तक 263
super30's anand
बच्चों को आईआईटी में दाखिला दिला, इंजिनियर बनवा देने वाले वाले गणीतज्ञ आनंद कुमार बड़े हैं , महान हैं
या
 देशी -विदेशी विद्वानों की पुस्तकों  से सामग्री  कट पेस्ट करके अपने नाम कई -कई किताबें छपवाकर  . जुगाड़ लगाकर विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर बन जाने वाले चोर गुरू ,भ्रष्टाचारी  गुरू  राम मोहन पाठक,अनिल उपाध्याय,रामजी लाल ,एसके सिन्हा, अनिल कुमार राय अंकित,रमेश चन्द्रा,दीपक केम आदि व इनके संरक्षक यानी भ्रष्टाचारी गुरू संरक्षक वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल वि.वि. जौनपुर के वर्तमान व इनके पहले वाले  कुलपति,कुलसचिव,महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पूर्व व वर्तमान कुलपति व कुलसचिव,महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी वि.वि. के  कुलपति विभूति नारायण राय ( यह पुलिस वाला जब कुलपति बना तो चोर अनिल कुमार राय को बना दिया प्रोफेसर ,हेड) जैसे भ्रष्टगुरू मंडलीवाले महान हैं ?

 dainik jagaran se sabhar , 16-06-2013
लखनऊ [अजय शुक्ला]। गोल चेहरा, चमकीली आंखें, खिचड़ी दाढ़ी, दरम्याना कद, दिल में कसक और बहुत कुछ करने की प्यास.. अपनी अनूठी पहल से 'सुपर-30' के जरिए गुदड़ी के लालों को मिट्टी से सोना बना देने वाले पटना के गणितज्ञ आनंद कुमार उन लोगों में से एक हैं जो अपने लिए सफलता और शोहरत के शिखर खुद बनाते हैं। वह दान के पैसे आज भी स्वीकार नहीं करते और खुद कमाकर लोगों को नि:शुल्क पढ़ाकर इंजीनियरिंग में दाखिला दिलाते हैं।
छात्रों के बीच 'सुपर-30' आज अपरिचित नहीं। गणितज्ञ आनंद ने वर्ष 2002 में पटना में नि:शुल्क कोचिंग, हॉस्टल और भोजन का सहारा देकर 30 बच्चों को महंगी मानी जाने वाली इंजीनियरिंग में दाखिले की पढ़ाई के लिए चुना और पहली ही बार में 18 बच्चों को दाखिले की सीढ़ी पर चढ़ा दिया। अब तक 263 छात्र देश के एलीट माने जाने वाले इंजीनियरिंग संस्थानों में पढ़ाई कर चुके या कर रहे हैं।
पिछले साल से उन्होंने यूपी से बच्चे लेना भी शुरू कर दिया है और इस साल एक जुलाई को इसके लिए लखनऊ में टेस्ट होगा। इसी सिलसिले में लखनऊ आए आनंद बताते हैं कि वैश्रि्वक स्तर पर नेम-फेम के बाद उनके पास सरकारी-गैर सरकारी दान-अनुदान के सैंकड़ों प्रस्ताव आए। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, उद्योगपति मुकेश अंबानी, उद्योगपति महेन्द्रा आदि ने मदद के प्रस्ताव किए पर वह दान के पैसे आज भी नहीं लेते। वजह, इससे रास्ता भटकने और सेवा के व्यवसाय में बदलने का खतरा है।
वैज्ञानिक बनने का था सपना
आनंद बताते हैं, हिंदी मीडियम सरकारी स्कूल में पढ़ता था। जब कक्षा सात-आठ में था, तभी वैज्ञानिक बनने का सपना देखा। कई प्रयोग किए। ट्रांजिस्टर, वायरलेस, लाइट डिपेंडेंट रजिस्टेंस के मॉडल बनाए। लगन देख लोगों ने कहा, पहले पढ़ाई पर ध्यान दे। पटना साइंस कॉलेज से ग्रेजुएशन के दौरान रुचि देख प्रो डीपी वर्मा ने मार्ग दर्शन किया।
मैथ की चार प्रॉपर्टी खोजी। प्रो वर्मा ने एडिट कर लंदन भेजी, चारों प्रकाशित हुई। सब शिक्षकों का चहेता बन गया। प्रो वर्मा के मार्गदर्शन से ही कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में दाखिला और स्कालरशिप मिली, लेकिन पिता के असामयिक निधन से कैम्ब्रिज का सफर शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया।
मां ने पापड़ बेले, हमने बेचे
पिता राजेंद्र प्रसाद डाक विभाग में पत्र छांटक थे। एक अक्टूबर, 1994 को कैम्ब्रिज में मेरी पहली कक्षा थी, जाने की तैयारी चल रही थी। इसी बीच 23 अगस्त को पिता का निधन हो गया। विकलांग चाचा, बीमार दादी, मां और छोटे भाई प्रणव की जिम्मेदारी पिता जी ही उठाते थे। निधन के बाद तुरंत पेंशन, फंड वगैरह भी नहीं मिला।
कैम्ब्रिज की फुल स्कॉलरशिप नहीं थी। रहने, खाने और जाने का खर्चा खुद उठाना था। यह सफर यहीं खत्म हो गया। मैंने मृतक आश्रित की नौकरी नहीं की। आजीविका के लिए मां मेरे नाम से पापड़ बनाने लगीं और मैं झोले में रखकर उन्हें बेचने लगा।
शुरू हुआ 'सुपर-30' का सफर
लोगों ने समझाया। पापड़ बेचने के बजाए ट्यूशन पढ़ाओ। 1996 में दो बच्चों से ट्यूशन शुरू किया और दो साल में डेढ़-दो सौ बच्चे हो गए। डेढ़ हजार सालाना फीस लेता था। लोकप्रियता काफी बढ़ चुकी थी। इसी बीच एक लड़का अभिषेक जो काफी गरीब था। उसने कहा, पांच-पांच सौ तीन बार में ले लें क्योंकि पिता जब खेत से आलू निकलवाते थे तभी घर पैसा आता था।
ऐसे बच्चों के लिए ही 'सुपर-30' का विचार आया। पढ़ाने के लिए मेरे साथ मेरे पूर्व छात्र प्रवीन कुमार, अमित कुमार और बाद में राहुल रंजन जुड़े। घर के बगल में छात्रों के रहने की व्यवस्था की। मां ने खाना बनाने का जिम्मा लिया। बाद में मेरी पत्नी और भाई प्रणव की पत्नी ने भी हाथ बंटाना शुरू कर दिया।
परिवार का मिला साथ
शादी के बाद मेरी पत्नी ऋतु रश्मी भी इस मिशन में शामिल हो गई। उन्होंने इसके लिए बेंगलूर में विप्रो की जॉब भी छोड़ दी। एक बेटा जगत है जो अभी छोटा है। पटना में जब कुछ कोचिंग माफिया ने हमला बोला तो पत्नी को लगा कि सब छोड़ कुछ अपने लिए भी किया जाए पर क्षणिक निराशा के बाद हम सब इससे उबर गए। इस समय कई लोगों ने सुपर-30 से मिलते-जुलते नाम रखकर कोचिंगों में उगाही शुरू कर दी है। हम चाहते हैं कि लोग इस मॉडल को अपनाएं पर उगाही न करें।
प्रोफाइल:-
पटना के आनंद कुमार हर साल गरीब तबके के 30 छात्रों को नि:शुल्क कोचिंग, फूडिंग, लॉजिंग मुहैया कराते हैं। इसका खर्च वह, उनका परिवार और टीम बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर उठाती है। इस मॉडल को उन्होंने सुपर-30 का नाम दिया है। देश-विदेश में इसके लिए उन्हें अनेक सम्मान मिले।
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Wednesday, June 12, 2013

UGC KYA CUT-PEST KARAKE LIKHI PUSTAKON PAR ANK DE PROF BANANE KO KAHA HAI

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यूजीसी के नियम के अनुसार, महाविद्यालयों व विश्वविद्यालयों के मास्टरों, अध्यापकों के पद पर नियुक्ति के लिए उम्मीदवारों को 50 प्रतिशत  अंक उनके अकादमिक व रिसर्च रिकार्ड, तीस प्रतिशत अंक उनके सामान्य ज्ञान व तकनीकी ज्ञान और 20 प्रतिशत अंक साक्षात्कार में किए गए प्रदर्शन के आधार पर मिलते हैं। 


यदि किसी चोरगुरू,भ्रष्टाचारी गुरू ने इंटरनेट से सामग्री कट-पेस्ट करके , विदेशी प्रोफेसरों ,विद्वानों की पुस्तकों का पेज का पेज, पूरा चैप्टर का चैप्टर हूबहू उतारकर अपने लेखक बनकर पुस्तक छपवा ले और उन पुस्तकों को साक्षात्कार में पेश करके , चोरगुरू संरक्षक भ्रष्टाचारी कुलपति के सक्रिय सहयोग से नियुक्ति पा जाय तो उसकी व उसको नियुक्त कराने वाले कुलपति को बर्खास्त किया जाना चाहिए। और जिस चोरगुरू ने ऐसा करके नौकरी पाया है उसको बर्खास्त करके उसको दिये गये वेतन की वसूली किया जाना चाहिए।

चोरगुरू अनिल कुमार राय अंकित ने हिंन्दी में पीएचडी किया है। चोरगुरू पातंजलि जब वीरबहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय का कुलपति बना तो अपने चहेते चोरगुरू शिष्य अनिल कुमार राय अंकित को  एढ़ाक लेक्चरर बना पत्रकारिता विभाग खोलवा दिया। इन दोनों चोरवों ने मिलकर पूरे विश्वविद्यालय को लगभग चोरगुरूओं की फैक्ट्री बना दी। चोरगुरू पातंजलि ने यह काम दिल्ली के दरियागंज के अपने चहेते पुस्तक प्रकाशक,सप्लायर  प्रशांत जैन के लाभालाभी सहयोग से किया कराया।चोरगुरू अनिल कुमार राय अंकित इस चोरकटई की धूरी बना और पूर्वांचल विश्वविद्यालय व शिक्षक व शिक्षा जैसे पवित्र पेशे को कलंकित करने में प्रमुख भूमिका निभाया।और चोरकटगुरूओं की पूरे देश में एक लम्बी श्रृंखला तैयार कर ली।यूजीसी व मंत्रालयों के भ्रष्ट अफसरों को भी साध लिये और उनको चढ़ावा चढ़ाकर बड़े बड़े प्रोजेक्ट लेकर माल डकारने लगे। सब चोरवे  एक दूसरे को वाइवा आदि में बुलाते,एक दूसरे की जमकर मदद करते और अघोषित चोरकटगुरू गैंग बना लिये थे। ये चोरवे कटपेस्ट करके अपने नाम से छपवाई पुस्तकों(नकल करके लिखी पुस्तकों का दाम ओरिजनल पुस्तकों से भी अधिक रखे)  को एक दूसरे के यहां के पुस्तकालयों में खरीदवाने और प्रकाशक व सप्लायर प्रशांत जैन के मार्फत मालबनाने का भी धंधा चमका लिये थे। इसमें ज्यादेतर विश्विद्यालयों के कुलपति भी शामिल हो गये थे।ऐसे भ्रष्टाचारी गुरूओं, चोरगुरूओं में पातंजलि, अनिल कुमार राय अंकित ,रामजी लाल,एसके सिन्हा, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का  राममोहन पाठक,अनिल उपाध्याय,जामिया मिलिया दिल्ली का दीपक केम ( इसने व अनिल राय अंकित ने मिलकर नकलकरके  किताब लिखी है, यह बर्खास्त हो गया),बुंदेलखंड वि.वि झांसी का कुलपति रहा रमेश चंद्रा आदि का नाम अब सब जानगये हैं। हरियाणा,पंजाब,हिमाचल,मध्य प्रदेश , दिल्ली, बिहार, झारखंड के अभी पहुत से नाम और हैं जो सामने आने हैं।          

corrupt VC NE do chaheton ko 20 number ke viva me 25 number de niyukt kiya


भ्रष्टाचारी वीसी ने अपने दो चहेतों को प्रोफेसर नियुक्त करने के लिए 20 अंक के वाइवा में 25 अंक दिया
दैनिक जागरण
हरजिंदर सिंह शैली, अमृतसर। पंजाब की गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (जीएनडीयू) में सूचना के अधिकार (आरटीआइ) के तहत मिलने वाली जानकारी से एक के बाद एक-एक कर वाइस चांसलर प्रो. अजायब सिंह बराड़ द्वारा हैरान कर दिए जाने वाले कारनामे सामने आ रहे हैं। वीसी ने असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती में सरेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई हैं। उन्होंने अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए 20 अंकों वाले इंटरव्यू में 25-25 अंक दे डाले।
गौरतलब है कि जीएनडीयू द्वारा नए बनाए गए कांस्टीट्यूट कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। उम्मीदवारों के अकादमिक व रिसर्च रिकार्ड को देखते हुए चयनित उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया था। यह इंटरव्यू 19 सितंबर, 2011 को आयोजित किया गया था।
यूजीसी के नियमों के अनुसार, उम्मीदवारों के लिए पचास फीसद अंक उनके अकादमिक व रिसर्च रिकार्ड, तीस फीसद अंक उनकी नॉलेज व तकनीक में महारत व बीस फीसद अंक इंटरव्यू में किए गए प्रदर्शन के आधार पर मिलते हैं। वीसी ने जिन उम्मीदवारों को असिस्टेंट प्रोफसर के पद पर नियुक्त किया, उन्हें इंटरव्यू के दौरान 20 में से 25 अंक दे दिया।
19 सितंबर, 2011 को जीएनडीयू कॉलेज वेरका के फिजिक्स विभाग के लिए सफल रहे उम्मीदवारों सोनिका ठाकुर व मनजिंदर कौर को 25-25 अंक दिए गए। ठीक उसी दिन नरोट जैमल सिंह कॉलेज में नियुक्त किए गए गुरप्रीत सिंह को भी 25 अंक मिले।
मामला सप्रमाण उजागर होने के बाद भ्रष्टाचारी कुलपति क्या कह रहा है देखें- यह अंक तकनीकी कारणों से ज्यादा चढ़ गए हैं। इसको सही करने के आदेश दिए जा चुके हैं।