Friday, April 15, 2011

तथाकथित चोरगुरू डा.अनिल कुमार उपाध्याय कार्रवाई से बचने के लिए कर रहे उपक्रम

नकल करके पत्रकारिता में एशिया का पहला डी-लिट.थिसिस लिखने के आरोपी डा.अनि कुमार उपाध्याय(Dr.Anil Kumar Upadhyay, Reader-Head , MahatmaGandhi KashiVidyaPeeth,Varanasi) कार्रवाई से बचने और प्रोफेसर बनने के लिए तरह तरह का उपक्रम कर रहे हैं। इसके लिए काशी से प्रयाग तक एक किये हुए हैं।नकल करके अपनी पी.एच-डी.थिसिस लिखने के आरोपी, इसी विश्वविद्यालय के एक अन्य पत्रकारिता विभाग के प्रोफेसर राम मोहन पाठक (Pro.RamMohanPathak) उनको साथ होने का भौकाल बना चढ़ा रहे हैं। कहा जाता है कि उपाध्याय पहले राम मोहन पाठक का बहुत विरोध करते रहे हैं, सो बड़ा गुरू पाठक अब फंसे उपाध्याय को सहानुभूति दिखाने व साथ होने का अभिनय करके और उलझा-फंसाकर अपना पुराना हिसाब चुकता करने में लगे हैं।

मालूम हो कि नकलचेपी आरोपी अनिल कुमार उपाध्याय ने कुलपति अवध राम(Pro.Awadh Ram) से प्रोफेसर पद पर प्रोन्नति होने की खानापूर्ति वाली साक्षात्कार तिथि 9 अप्रैल 2011 तय करा लिया था। अन्य की पुस्तक, शोध का पृष्ठ का पृष्ठ हूबहू उतारकर पी.एच-डी. व डी.लिट.थिसिस लिखनेवाले चोरगुरू अध्यापकों के तथाकथित संरक्षक कुलपति अवध राम ने, राममोहन पाठक और अनिल कुमार उपाध्याय के नकलचेपी कारनामों के खिलाफ बीते डेढ़ साल में कई बार सप्रमाण लिखित शिकायत के बावजूद, इन अध्यापकों( राम मोहन पाठक, अनिल कुमार उपाध्याय) के कदाचार के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की। और नहीं तो अनिल कुमार उपाध्याय को प्रोफेसर बनाने की तैयारी कर ली। इस सबकी जब प्रमाण सहित शिकायत राज्यपाल और यूजीसी में गया और वहां से जब नकल करके डि.लिट.थिसिस लिखने के आरोपी अनिल कुमार उपाध्याय को प्रोफेसर बनाने के लिए 9 अप्रैल 2011 को होने वाला साक्षात्कार रद्द करने का आदेश आया तब जाकर कुलपति अवध राम ने साक्षात्कार रद्द किया। वरना उसके पहले तो अवध राम नकल के आरोपी के लिए फैसिलिटेटर का ही कार्य किये। अब वही अवध राम इस आरोपी व उसके सहयोगी गुरूवों से कह रहे हैं कि देखिये मैंने तो इनको (पत्रकारिता में एशिया के एक मात्र डि.लिट. अनिल कुमार उपाध्याय को )प्रोफेसर बनाने के लिए सभी इंतजाम कर दिया था, लेकिन जब राज्यपाल और यूजीसी ने ही रोक दिया तो अब मैं क्या कर सकता।

कहा जाता है कि 8 अप्रैल 2011 को जब नकलचेपी आरोपी अनिल कुमार उपाध्याय को 9 अप्रैल 2011 को होने वाला उनका साक्षात्कार रद्द होने की सूचना मिल गई तो उन्होंने हर हाल में साक्षात्कार कराने के लिए लखनऊ से लगायत दिल्ली तक बहुत हाथ-पांव मारा। चर्चा है कि नकलचेपी आरोपी राम मोहन पाठक ने भी उनको वीर तुम बढ़े चलो के अंदाज में बढते रहने के लिए कहा और दिखाने के लिए कि हम भी इसघड़ी में आपके साथ हैं, यूजीसी में किसी का नम्बर डायल कर करके कहने लगे- भाई साहब,कृपया नामिनी को साक्षात्कार लेने के लिए भेजिए, रोकिये मत। चर्चा है कि नकलचेपी आरोपीयों ने कानूनविदों का भी दरवाजा खटखटाया। अन्य लोग भी तरह-तरह के सलाह दे रहे हैं।कोई सलाह दे रहा है मामा जी, इस मामले में आपको पाने के लिए कुछ भी नहीं है, जो है सब खोने के लिए ही है, आप की डि.लिट. की डिग्री रद्द हो सकती है, कदाचार के चलते आपकी नौकरी जा सकती है। कोई कह रहा है आप पत्रकारिता में एशिया के पहले डि.लिट. हैं,तथाकथित तमाम चोरगुरूओं के नेता हैं,लगाइये जुगाड़; कर दीजिए राज्यपाल,यूजीसी,कुलपति पर मुकदमा।आपलोग जैसे प्रतिभाशाली समर्थवान का कार्य किसी न किसी तरह से तो होगा ही।बता दें कि समरथ को नहीं दोष गोसाईं सो दोनो चोरी के आरोपी गुरू जुटे हुए हैं।