Saturday, January 9, 2010

कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय, रायपुर कुलपति पद के लिए भी भ्रष्टाचार के आरोपी, जुगाड़ी हैं दावेदार

-सत्ताचक्र-
कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता वि.वि. रायपुर के कुलपति का पद 17 मार्च 2010 को खाली हो रहा है। उसके लिए जो सर्च कमेटी बनी है उसमें तीन लोग हैं –भाजपा के राज्यसभा सांसद प्रभात झा, छत्तीसगढ़ सरकार के उच्चशिक्षा सचिव , यू.जी.सी की कन्सोल्टियम आफ एजुकेशनल कम्यूनिकेशन के निदेशक टी.आर.केम । जिसकी बैठक 11 जनवरी2010 को रायपुर में होने वाली है।
एजुकेशनल सर्च कमेटी में किसी सांसद का नाम नहीं होना चाहिए लेकिन बताया जाता है कि इसमें कार्यपरिषद नामिनी के तौर पर प्रभात झा का नाम है । टी.आर.केम का नाम यू.जी.सी. की तरफ से यू.जी.सी.चेयरमैन थोराट ने दिया होगा।दोनो दलित हैं।टी.आर.केम को निदेशक थोराट ने बनाया है। केम पर भ्रटाचार के आरोप हैं।इनके सगे पुत्र नकलचेपी दीपक केम हैं, जो जामिया मिलिया , दिल्ली में रीडर हैं और नकल करके कई किताबे लिखे हैं। ये साहब महात्मागांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी वि.वि.वर्धा में अध्यापक अनिल के. राय अंकित( तब पूर्वांचल वि.वि. में लेक्चरर ) के साथ मिलकर ,विदेशी किताबों के चैप्टर का चैप्टर हूबहू उतारकर करके एक 2500 रू. की फोटोग्राफी की किताब भी लिखे हैं। जो CNEB न्यूज चैनल पर खोजपरक कार्यक्रम चोरगुरू में दिखाया गया था। और नकल करके लगभग एक दर्जन पुस्तकें लिखने के अरोपी अनिल के राय अंकित को कुशाभाऊ ठाकरे वि.वि. में सच्चिदानंद जोशी ने रीडर हेड पद पर नियुक्त करवाया था। जोशी अभी भी नकलचेपी अंकित के निजी पत्रिका में एडीटोरियल बोर्ड में हैं।अंकित पर यू.जी.सी. प्रोजेक्ट में भी धांधली का आरोप है। कहा जाता है कि इस तरह इन सबका एक चेन बन गया है।
सूत्रो का कहना है कि इस चेन के चलते इस सर्च कमेटी में प्रभात झा, उच्चशिक्षा सचिव और केम की तरफ से निवर्तमान कुलपति सच्चिदानंद जोशी का नाम सूची में डाला जाना लगभग पक्का है। चर्चा है कि सच्चिदानंद जोशी की तरफदारी प्रभात झा कर रहे हैं , और वह उनको एक टर्म और दिलवाना चाहते हैं। लेकिन जोशी पर कुलपति रहते कई तरह के आरोप लगे हैं। जिसमें से कुछ की रिपोर्ट राज्यपाल के पास भी पहुंच गई है।कहा जाता है कि यहां भी ,कुलपति पद के लिए सूची में नाम डलवाने के लिए भ्रटाचार के आरोपी राममोहन पाठक भी जुगाड़ लगा रहे हैं।सूत्रो के मुताविक टी.आर.केम के मार्फत राममोहन पाठक अपना नाम सूची में डलवाने का जुगाड़ बैठाये हैं । कहा जाता है कि केम पर पुष्पम्-पत्रम् विधा से यह सब करने का आरोप पहले भी लग चुका है।यदि इसबार ऐसा होता है तो उनके खिलाफ सी.बी.आई. जांच की मांग होगी।राज्य के राज्यपाल के यहां केम पिता-पुत्र के अलावा राम मोहन पाठक के तथाकथित भ्रष्टाचार के कारनामों का पुलिंदा पहुंच चुका है।हरियाणा के एक विश्वविद्यालय से मास्टर पद छोड़कर भागे तथाकथित भ्रष्टाचारी व नकलचेपी गैंग के एक और महानुभाव भी कुलपति पद के लिए दावा करते फिर रहे हैं। वह कह रहे हैं कि वही एक मात्र योग्य छत्तीसगढ़ीब्राह्मण हैं जो कुलपति पद के योग्य हैं।रीडर पद नहीं भाया ,अब सीधे कुलपति पद पर दावा कर रहे हैं। मध्य प्रदेश के भी एक सज्जन एड़ी-चोटी का जोर लगाये हुए हैं। तीन नाम और चर्चा में हैं।